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14/9/10

" हिंदी हमारी हृदयाभिलाषा ! " " हिंदी गूंजे पंचम स्वर में ! "



हिंदी दि पर शुकानाएं !

 अधिक संतुष्टि और प्रसन्नता की बात होती, 
यदि  आज हिंदी की स्थिति ऐसी हुई होती कि
हिंदी दिवस मनाने जैसी आवश्यकता ही नहीं होती तो
...  ...  ...

 …
~* प्रस्तुत है एक सवैया और एक गीत *~
                               


हिंदी  हमारी  हृदयाभिलाषा !

भाव भरी , अनुभाव भरी , सद् भाव भरी , सु - आनंद - समासा !
भाग्य - भगीरथी  भद्रजनों की ,  भारतवर्ष की  भगवद् - भाषा !!
आदि - अनादि , चिरंतन - नूतन , आर्यावर्त - अखिल - अभयाशा !
हृदगत् हरि लौं  हर्ष - विवर्धिनी,  हिंदी  हमारी  हृदयाभिलाषा  !!

- राजेन्द्र  स्वर्णकार 


हिंदी गूंजे पंचम स्वर में !

यह अक्षर निधि हमारी है ! हिंदी हमको प्यारी है !

हिंदी अपनी भाषा है , हिंदी ही अपनी बोली है !
हिंदी  क्रिसमस ईद वैशाखी दीवाली है, होली है !
लिपि प्रेम समन्वय न्याय की, 
यह प्रभा प्रगति - पर्याय की,
यह सांस हर इक समुदाय की ! 
नत मस्तक जगती सारी  है ! हिंदी हमको प्यारी है !

हिंदी ; हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई ... सबका प्राण है !
हिंदी लय है , तान है, हिंदी मधुर सुरीला गान है !
ध्वनि आलाप मधुर घर - घर में,
शब्द - शब्द , अक्षर - अक्षर में,
हिंदी गूंजे पंचम स्वर में !
घर - आंगन की किलकारी है ! हिंदी हमको प्यारी है !  

हिंदी - संभाषण में  अनुभव होता शहद मिठास का !
हिंदी जिन हृदयों में बसी है , वहां वास मधुमास का !
नव - उत्साह - लहर दे हिंदी,
दीप प्रज्ज्वलित कर दे हिंदी,
श्रद्धा मन में भर दे हिंदी !
हिंदी बहुत हृदयहारी है ! हिंदी हमको प्यारी है ! 

हमें कब्र से चिढ़ा रही… 'मैकाले' की मुस्कान अभी !
करें आज से निज भाषा पर गर्व और अभिमान सभी !
अब हम हिंदी को अपनालें, 
हृदय - हृदय में इसे बसालें,
राष्ट्रभक्ति का धर्म निभालें !
कहां विवशता - लाचारी है ?  हिंदी हमको प्यारी है !

अंग्रेजी को घर से बाहर हिंदी आज निकालेगी !
आज स्वामिनी अपने गृह की सत्ता स्वयं सम्हालेगी !
निज भाषा संज्ञान चाहिए,
निखिल - अखिल अभियान चाहिए,
हिंदी को सम्मान चाहिए !
हिंदी पहचान हमारी है ! हिंदी हमको प्यारी है !

- राजेन्द्र  स्वर्णकार 


… विलंब से ही सही …
गणेशचतुर्थी , ईद , ॠषिपंचमी और पर्युषण पर्व 
सारे त्यौंहारों के लिए मेरी ओर से हार्दिक मंगलकामनाएं !


शुभास्ते संतु पंथानः

46 टिप्‍पणियां:

डॉ. मोनिका शर्मा ने कहा…

बहुत ही प्यारी और प्रभावी रचना है.....
अब हम हिंदी को अपनालें ......
हृदय हृदय में इसे बसा लें.....
बहुत ही सार्थक पंक्तियाँ
सभी त्योंहारों की आपको भी बधाई

राजभाषा हिंदी ने कहा…

राजभाषा हिन्दी के प्रचार-प्रसार में आपका योगदान सराहनीय है।

मैं दुनिया की सब भाषाओं की इज़्ज़त करता हूँ, परन्तु मेरे देश में हिन्दी की इज़्ज़त न हो, यह मैं नहीं सह सकता। - विनोबा भावे

भारतेंदु और द्विवेदी ने हिन्दी की जड़ें पताल तक पहुँचा दी हैं। उन्हें उखाड़ने का दुस्साहस निश्‍चय ही भूकंप समान होगा। - शिवपूजन सहाय

हिंदी और अर्थव्यवस्था-2, राजभाषा हिन्दी पर अरुण राय की प्रस्तुति, पधारें

Arvind Mishra ने कहा…

हिन्दी दिवस पर आपकी कविता का रसास्वादन आज की बड़ी उपलब्धि है !

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

बहुत सुन्दर गीत ...

अमित शर्मा ने कहा…

कितना रस भरा है हिंदी में, और आपकी लेखनी इस रस में पग कर कितना उल्लासित करती है, यह शायद आप भी नहीं जानतें होंगे. मन अन्दर तक भीग गया है पढ़ कर . आभार

shikha varshney ने कहा…

बहुत बहुत सुन्दर गीत ..हिंदी के बारे में ये सब पढकर बहुत गर्व होता है.

हरकीरत ' हीर' ने कहा…

जय हिंद ....!!

जय हिंदी .....!!

जय जय हिन्दुस्तान .....!!

हरकीरत ' हीर' ने कहा…

जय हिंद ....!!

जय हिंदी .....!!

जय जय हिन्दुस्तान .....!!

baddimag ने कहा…

rajendra jee shabd shabd prbhavi
akchar akchar bhari hain
hindi ko aap mile hain
fir kaisi lachari hai

ALOK KHARE ने कहा…

Aap jaise hindi premiyun ke hot ehue ,
ye hindi kabhi maregi nhi,

ye mashaal jalti rahegi,

bahut bahut sadhubad

डॉ टी एस दराल ने कहा…

राजेंद्र भाई , हिंदी दिवस पर इससे बेहतर रचना हो ही नहीं सकती ।
आपने बहुत अच्छा परिभाषित किया है हिंदी को ।
बधाई और शुभकामनायें ।

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

हिन्दी दिवस की बहुत बधाई।

sushil ने कहा…

हिंदी दिवस पर हार्दिक बधाई दिव्य कविता

डा सुभाष राय ने कहा…

हिंदी के वर्तमान और भविष्य को लेकर हम सभी चिंतित हैं. सरकार जिस तरह हिन्दी दिवस की भाषा बनाकर इसे खत्म करने के उपक्रम में जुटी है, वह बहुत दुखी अरने वाला है.आप का हिन्दी वन्दन अच्छा लगा.

डा सुभाष राय ने कहा…

हिंदी के वर्तमान और भविष्य को लेकर हम सभी चिंतित हैं. सरकार जिस तरह हिन्दी दिवस की भाषा बनाकर इसे खत्म करने के उपक्रम में जुटी है, वह बहुत दुखी अरने वाला है.आप का हिन्दी वन्दन अच्छा लगा.

निर्मला कपिला ने कहा…

हिंदी दिवस पर हार्दिक बधाई दिव्य कविता

नीरज गोस्वामी ने कहा…

दुःख की बात है के हम जिस भाषा में सोचते हैं लिखते हैं उसी भाषा को बोलने में हिचकिचाते हैं...अंग्रेजी भाषा का मैं विरोधी नहीं लेकिन अकारण उसे बोलना मुझे अभी भी हमारी गुलामी का परिचायक लगता है...हम मानसिक रूप से अभी भी अंग्रेजों के गुलाम हैं और न जाने कब तक रहेंगे...

जो देश अपनी भाषा बोलने से शर्माता हो वो कैसे दुनिया का शीर्ष देश बनने का सपना देखता है ये आश्चर्य की बात है...

हिंदी को मात्र हिंदी दिवस तक सिमित कर हम इस भाषा का अपमान ही कर रहे हैं...आपने कभी किसी अंग्रेजी बोलने वाले देश को अंग्रेजी दिवस मनाते सुना है क्या?

आपकी रचना हमेशा की तरह प्रेरक है...काश हम इसे अपने दिल में सदा के लिए उतार पाते...

नीरज

Roshani ने कहा…

आपको भी हार्दिक बधाई...
में नीरज जी की बात से पूरी तरह सहमत हूँ.

जेन्नी शबनम ने कहा…

bahut achhi aur prabhaavshaali prastuti, shubhkaamnaayen.

रजनी नैय्यर मल्होत्रा ने कहा…

पश्चिमीकरण से वशीभूत होकर हम इस घुड दौड़ में दौड़ रहे,
भा गयी भाषा विदेशी इतनी ,हम हिंदी माँ को छोड़ रहे.

सही कहा है ........ हमें हिंदी हमारी मातृभाषा है ये याद दिलाने के लिए ही तो हिंदी दिवस जैसे पर्व को मनाना पड़ रहा...........इससे बड़ी और क्या विडम्बना है भारतीयों पर, क्या दूसरी की माँ अपनी मां से ज्यादा खुबसूरत है तो क्या हम अपनी माँ को छोड़ देते हैं या छोड़ देंगे.? सम्मान देना दूसरे के भाषा को और अपनी व्यवहार में उसे पूरा उतार लेना बात बिल्कुल जुदा है ..........

इमरान अंसारी ने कहा…

आरज़ू है ये की हिंदी हर हिन्दुस्तानी के दिलों में फिर से बसे |

PRAN SHARMA ने कहा…

HINDI DIVAS PAR SABKO BADHAAEE .
AAPKAA GEET PRARTHNA KEE TARAH HAI.

Asha ने कहा…

हिंदी दिवस पर शुभ कामनाएं |
आशा

Coral ने कहा…

बहुत सुन्दर रचना

आपको हिंदी दिवस कि शुभकानाए !

तिलक राज कपूर ने कहा…

मैं निपट अज्ञानी, तुलनात्‍मक विश्‍लेषण में विश्‍वास नहीं रखता; कठिन होता है; तुलनात्‍मक विश्‍लेषण के लिये विषद ज्ञान आवश्‍यक होता है जाू मुझमें नहीं है। सृष्टि में आज जो कुछ भी है उसका एक लंबा इतिहास है। इतने दीर्घकालिक इतिहास से होकर हम तक जो भी पहुँचा उसी में जाति, धर्म और भाषा भी हैं। कठिन है यह कहना कि कौनसी भाषा का क्‍या अस्तित्‍व है। मैं तो मूलत: पंजाबी हूँ, मध्‍यप्रदेश में ही पैदा ओर बडा हुआ हिन्‍दी के बीच, अंग्रेजी माध्‍यम से पाला पडा इंजीनियरिंग के समय और फिर कुछ योग ऐसे रहे कि धीरे-धीरे दोनों भाषाओं पर समान नियंत्रण की स्थिति आ गयी। अंग्रेजी और हिन्‍दी दोनों भाषाओं में खूब पढा लेकिन सहज आज भी हिन्‍दी में ही हूँ इसका सम्‍मान करता हूँ मगर उतना ही जितना अन्‍य भाषाओं वाले अपनी मातृभाषा का करते हैं।
हिन्‍दी दिवस आदि इस प्रकार के आयोजन इतने औपचारिक हो चुके हैं कि अपना अर्थ खो चुके हैं।

S.M.HABIB ने कहा…

"हिंदी का प्रसार, हिंद का आधार. "
अद्भुत रचना. बचाई. आभार.

रंजना ने कहा…

मर्मस्पर्शी अतिसुन्दर रचना...

" हिंदी हमारी हृदयाभिलाषा " का भाव और रचना सौंदर्य तो बस निःशब्द ही कर गया...

अपने इस भाषा के लिए हम इतना ही कर सकते हैं कि इसे हिंदी दिवस में न बांधकर दिनानुदिन प्रयोग में ,व्यवहार में लायें...इसपर आस्था सुदृढ़ करें और औरों को भी इस हेतु प्रोत्साहित करें...

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

प्रियवर राजेन्द्र जी!
हिन्दी-दिवस के आवसर पर आपने सवैया एवं गीत बहुत सुन्दर रचा है!
--
बहुत-बहुत शुभकामनाएँ!

alka sarwat ने कहा…

हिन्दी के प्रति आपकी भावनायें प्रशंसनीय हैं
ये सम्पर्क सूत्र अरविन्द जी के हैं


jha.arvind1963@gmail.com
0522-2240238
9452267466
9598246350

kunalkishore ने कहा…

sabse pehle aapko bahut bahut dhanyabad ki aapne meri rachna ko saraha,,,,,,,isi tarha hamara manobal badhate rhen,,aap sab ke sath umeed hai kuchh accha karte rahegne,
ab iske liye v aapko dhanyawad ki aapne bahut achhi rhachana likhi hai, wakai shandar bhav
shubhkamnayon ke sath
kunal kishore

डॉ. हरदीप संधु ने कहा…

बहुत सुन्दर गीत ...
हिन्दी दिवस की बहुत बधाई।

Rajesh Kumari ने कहा…

hindi bhasha par aapka saviya aur kavita behad khoobsurat hain
niz bhasha sangyan chahiye
nikhil akhil abhiyaan chahiye
hindi ka smman chahiye.....bahut achche prerna dayak bhaav
aapko bahut bahut badhaai.

Udan Tashtari ने कहा…

देर से आने का अफसोस..नुकसान मेरा ही हुआ कि इतनी बेहतरीन रचना का रसास्वादन देर से कर पाया किन्तु संपूर्ण आनन्द आया.

सुन्दर लेखनी..बहुत बधाई.

जितेन्द्र ‘जौहर’ Jitendra Jauhar ने कहा…

श्री राजेन्द्र स्वर्णकार जी,
नमस्कारम्‌!
परिमार्जित भाषा में हिन्दी की भावमय एवं तथ्यपूर्ण पक्षधरता के लिए साधुवाद!
-जितेन्द्र ‘जौहर’

boletobindas ने कहा…

हिंदी पर खूबसूरत रचना। कुछ-कुछ ऐसी जैसे ''''विश्व विजय तिरंगा प्यारा.....।

दोस्त मेरे ब्लॉग से कोई नराजगी है क्या। है तो बताओ दूर करने की कोशिश



नहीं करुंगा.....


दोस्त हो झगड़ा तो बनता है अपना

भारतीय की कलम से.... ने कहा…

हिंदी हिंद की जान है, भारत की पहचान है ...........!!
इस बेहद सुन्दर और प्रभावी पोस्ट के लिए सादर बधाई प्रेषित है कृपया स्वीकार करें........!!

डॉ. नूतन गैरोला " अमृता " ने कहा…

हिंदी पर इतनी सुन्दर रचना और चित्र भी सार्थक .. देर से ही आई पर दुरस्त .. शुभकामनाएं

इस्मत ज़ैदी ने कहा…

आप हर विषय पर और सही समय पर कैसे लिख लेते हैं ?
बहुत सुंदर रचना ,सच हिंदी हमें बहुत प्यारी है और जहां तक सवाल है अंग्रेज़ी का ,वो भी एक भाषा है ज़रूर सीखें लेकिन उसे हिंदी पर हावी न होने दें ,मैं नीरज जी की बात से सहमत हूं कि अकारण अंग्रेज़ी बोलना ग़ुलामी का परिचायक है मुझे अपना एक शेर याद आता है

हुईं मुद्दतें वो चले गए ,प हमारा ज़ह्न तो आज भी
उसी नह्ज का, उसी सोच का,उसी मुम्लिकत का ग़ुलाम है

Sriprakash Dimri ने कहा…

bahut sundar rachnaa hai.. aur deshbhaqti aur hindi hindustan ki bhavnaa bahut khoob...

उपेन्द्र " the invincible warrior " ने कहा…

हिन्दी-दिवस के आवसर पर बहुत सुन्दर प्रस्तुति. आपकी कविता ने मन को मोह लिया.सारे गुण हिन्दी के आपने बडी सहजता से कह डाले .जय हिन्दी.......

डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर ने कहा…

नमस्कार,
जन्मदिन की शुभकामनायें हम तक प्रेम, स्नेह में लिपट पर पहुँचीं.
मित्रों की शुभकामनायें हमेशा आगे बढ़ने की प्रेरणा देतीं हैं.
आभार

राणा प्रताप सिंह (Rana Pratap Singh) ने कहा…

राजेंद्र जी|
विलम्ब से पहुँचने के लिए क्षमाप्रार्थी हूँ|
हिंदी के गुणगान में सवैया बहुत ही सुन्दर लगा| ये मत्तयगंद सवैया है न?
गीत भी हिंदी की कथा और व्यथा बखूबी बयाँ कर रहा है|
बहुत सुन्दर लगे दोनों|ब्रह्माण्ड

sandhyagupta ने कहा…

अधिक संतुष्टि और प्रसन्नता की बात होती,
यदि आज हिंदी की स्थिति ऐसी हुई होती कि
हिंदी दिवस मनाने जैसी आवश्यकता ही नहीं होती

सौ टके की बात

जहाँ तक रचना का सवाल है तो यह हिंदी दिवस पर आपकी तरफ से एक अनमोल तोहफा है.

प्रकाश ⎝⎝पंकज⎠⎠ ने कहा…

कैसे गूंगा भारत महान जिसकी कोई राष्ट्रभाषा नहीं ?

मेरी दो कविताएँ हमारी मातृभाषा को समर्पित :
१. उतिष्ठ हिन्दी! उतिष्ठ भारत! उतिष्ठ भारती! पुनः उतिष्ठ विष्णुगुप्त!
http://pankaj-patra.blogspot.com/2010/09/hindi-diwas-rashtrabhasha-prakash.html

२. जो मेरी वाणी छीन रहे हैं, मार डालूं उन लुटेरों को।
http://pankaj-patra.blogspot.com/2010/09/hindi-diwas-matribhasha-rashtrabhasha.html
– प्रकाश ‘पंकज’

Monu Deka ने कहा…

अति सुन्दर कविता! क्या इस कविता का पाठ हिंदी दिवस के उपलक्ष में १४ सितम्बर को अपने कार्यालय में कर सकता हूँ | कृपया अनुमति दें |

निरंजन शर्मा ने कहा…

इसी भावना ने आज तक हिंदी को सम्मानित करवाया है अन्यथा मैकाले के मानस पुत्रों ने हम हिंदी पुत्रों कब का वनवास दे दिया होता | सादर वन्दन अभिनन्दन सभी हिंदी पुत्रों का