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1/8/11

तुम देवी ... मैं मानव

आज प्रस्तुत है मेरा एक पुराना गीत

तुम देवी ... मैं मानव

तुम जीवन की नव तरुणाई हो,
और ... मैं ढलता यौवन हूं !
तुम ऊगते सूरज की लाली ,
मैं संध्या का धुंधलापन  हूं !
तुम कुहुक मधुर कोयल की ,
पपीहे प्यासे का  मैं क्रंदन हूं !
तुम खिलती फलती मोहक बगिया ,
मैं सूखा सुलगा वन हूं !
तुम मधुर रागिनी वीणा की ,
मैं टूटे तार की झन झन हूं !
तुम रुत बासंती रस भीनी ,
मैं आंसू झरता सावन हूं ! 
तुम जलते दीपक की ज्योति
और ... मैं अंधियारा गहन घन हूं !
तुम चपला चंचल हृदया हो ,  
मैं व्यथित दुखित आहत मन हूं !    
तुम  सृजनहार की सुंदर रचना ,
और ... मैं अप्रिय अंकन हूं !  
तुम रूपवती शृंगार निधि हो ,
और ... मैं टूटा दर्पण हूं !
सौभाग्यवती तुम सर्वप्रिया ,
दुर्भाग्य का  मैं आलिंगन हूं !
नहीं संभव अपना मिलन कभी ;
तुम देवी हो ... मैं मानव हूं !
-राजेन्द्र स्वर्णकार 
©copyright by : Rajendra Swarnkar



सुनिए , यही गीत
मेरे शब्द , मेरी धुन  , मेरे स्वर में 

-राजेन्द्र स्वर्णकार   
©copyright by : Rajendra Swarnkar


68 टिप्‍पणियां:

Bhushan ने कहा…

यह टिप्पणी लिखते हुए आपके मधुर स्वर से अभिभूत हो रहा हूँ. क्या बात है. मंच पर यह श्रोताओं को कील देने में सक्षम है. वाह !!!

Maheshwari kaneri ने कहा…

मधुर भाव के साथ सुन्दर शब्द चयन...मनोहारी प्रस्तुति...धन्यवाद...

मान जाऊंगा..... ज़िद न करो ने कहा…

Ho bhi gaya mail apna to blolo milan kahan par hoga...
Neeraj ji ki yaad dilati hai ye rachna... Behtar aur prabhavshali tareeke se bhaavon ki abhvyakti hai is kavita mein


Aakarshan

'साहिल' ने कहा…

राजेंद्र जी,
बहुत ही खूबसूरत पंक्तियाँ हैं. आपका मधुर स्वर के 'सोने पे सुहागा' का काम कर रहा है.

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

पढ़ कर हृदय आनन्द के अतिरेक में चला गया।

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

बहुत सुन्दर गीत ..

चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ ने कहा…

हास्य कहूँ या हीन-भाव कुछ कहने में असमर्थ हुआ, बस इतना ही कहता हूँ तू प्रस्तुति में ग़जब समर्थ हुआ।...बहुत-बहुत शुभकामना

sushma 'आहुति' ने कहा…

खुबसूरत भावो और एहसासों के साथ रची रचना....

Navin C. Chaturvedi ने कहा…

क्या शब्द क्या स्वर और क्या रंग - आपका जवाब नहीं सर जी| आनंद आ गया| आज फिर से सुन रहा हूँ वो वाली ग़ज़ल|

रश्मि प्रभा... ने कहा…

aapke swar me rachna ke ek ek bhaw aur mukhrit ho uthe

kumar ने कहा…

बहुत ही अच्छा लगा आपको पढकर....

veerubhai ने कहा…

एक परिवेश प्रेम स्तुति का अपने को "कबीरा कुछ न बन जाना तजके मान गुमान "वाला अंदाज़ और स्वर भाव संसिक्त .क्या कहना है स्वर्ण - कारजी आपका .बहुत खूब .कृपया यहाँ भी पधारें .

रविकर ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति महोदय ||

बधाई स्वीकार करें ||

Rajesh Kumari ने कहा…

kya kahun shabd kam pad rahe hain prashansa ke liye.

सागर ने कहा…

bhaut khubsurat rachna...

वर्ज्य नारी स्वर ने कहा…

Aanand ki fuhar barsaati madhur rachana...jee shukriya

संध्या शर्मा ने कहा…

मधुर भाव...सुन्दर शब्द...मनोहारी प्रस्तुति...धन्यवाद...

सदा ने कहा…

आपकी इस बेहतरीन प्रस्‍तुति ने तो नि:शब्‍द कर दिया ...आभार ।

ताऊ रामपुरिया ने कहा…

अत्यंत भावपूर्ण मनोहारी रचना, शुभकामनाएं.

रामराम

vattsala pandey ने कहा…

एक सुन्दर रचना. जिसमें स्त्री को अस्तित्व को सराहा गया है. अबिनंदन.

Amrita Tanmay ने कहा…

बहुत ही खुबसूरत रचना..

डॉ टी एस दराल ने कहा…

नारी को देवी का दर्ज़ा देना तो बहुत अच्छा लगा । लेकिन मानव होना भी अपने आप में कहाँ कम है ।
गायन में सारी श्रद्धा उंडेल दी है ।
अति सुन्दर ।

मेरा साहित्य ने कहा…

aapki awaj aapki rag ,aapka geet kis kis ke bare me likhun.sabhi kamal ek insan me itni pratibha kam hi milti hai .
bahut hi anand may geet
badhai
rachana

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

यह तो कालजयी रचना है आपकी!
गीत कभी पुराना नहीं होता है!
--
चौमासे में श्याम घटा जब आसमान पर छाती है।
आजादी के उत्सव की वो मुझको याद दिलाती है।।....

Dr Varsha Singh ने कहा…

ओह .....यहां तो रसवर्षा हो रही है....
शब्द-शब्द राग और रस से भरे इस सुन्दर गीत के लिए हार्दिक शुभकामनायें...

चित्र भी चित्ताकर्षक.....

कौशलेन्द्र ने कहा…

हे स्वर्ण कार ! तुम सोना हो ,
भाव जगत के नंदन हो /
सुमधुर गायन के गौरव हो .
उपवन में जैसे चन्दन हो /

' मिसिर' ने कहा…

बहुत सुन्दर गीत ,प्रेम और समर्पण से ओतप्रोत ! बहुत बधाई आपको राजेन्द्र जी !

रेखा ने कहा…

सर ,बहुत ही शानदार और लाजबाब प्रस्तुति ,लिखने को शब्द नहीं हैं आपने तो सब कुछ कह डाला है ....आभार

Mrs. Asha Joglekar ने कहा…

बेहद खूबसूरत गीत । जितनी सुंदर कविता उतना ही मधुर गायन । आपकी आवाज के तो क्या कहने कितनी गहराई है इसमें ।

Mrs. Asha Joglekar ने कहा…

और हां, चित्रों के बारे में कहना तो भूल ही गई । बहुत ही सुंदर और कविता के भाव के साथ जाते हुए चित्र .

S.M.HABIB ने कहा…

भईया, शुभ प्रभात...
सुबह सुबह ऐसा सुन्दर गीत सुनना....
इससे अच्छी शुरुआत सुबह की और क्या हो सकती है...
सादर बधाई और आभार...

minoo bhagia ने कहा…

main to chitr dekhti rah gayi rajendra ji ,
kabhi sunne ka waqt nahin mila ,
bahut sunder hi hoga

Anand Vishvas ने कहा…

आज के वेदना और मुश्किलों के बोझ पिघलते मानव जीवन में, ठंडी वयार और शीतलता को प्रदान करने वाली नारी का विश्लेषण अपने बड़ी ही सहजता से किया है.
साधुवाद.

आनन्द विश्वास.

vidhya ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति महोदय
बहुत सुन्दर गीत

link http//sarapyar.blogspot.com//

Dilbag Virk ने कहा…

आपकी पोस्ट आज के चर्चा मंच पर प्रस्तुत की गई है , कृपया पधारें
चर्चा मंच

वन्दना ने कहा…

वाह गज़ब के भावों को पिरोया है।

ana ने कहा…

bahut hi sundar prastutikaran...sumadhur awaz...wah

कविता रावत ने कहा…

bahut sundar madhur manohari bolti rachna..
Haardik shubhkamna!

prerna argal ने कहा…

बहुत सुंदर शब्दों में लिखी दिल को छूनेवाली शानदार रचना /बधाई स्वीकार करें /

डॉ. जेन्नी शबनम ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति, बधाई स्वीकारें.

Dorothy ने कहा…

खूबसूरत अहसासों को पिरोती हुई खूबसूरत अभिव्यक्ति. आभार.
सादर,
डोरोथी.

Vijay Kumar Sappatti ने कहा…

क्या खूब राजेंद्र जी ..
देरी से आने के लिये क्षमा .
लेकिन आना सार्थक हुआ .. क्या लिखा है .. लग रहा है कि मेरे लिये ही लिखा हुआ है ..
आप तो बस आप हो ..

आभार

विजय

कृपया मेरी नयी कविता " फूल, चाय और बारिश " को पढकर अपनी बहुमूल्य राय दिजियेंगा . लिंक है : http://poemsofvijay.blogspot.com/2011/07/blog-post_22.html

Suresh Kumar ने कहा…

राजेन्द्र जी मंत्रमुग्ध कर दिया आपने..बहुत लाजवाब रचना और गीत..
आभार.

हरकीरत ' हीर' ने कहा…

हे स्वर्ण कार ! तुम सोना हो ,
भाव जगत के नंदन हो /
सुमधुर गायन के गौरव हो .
उपवन में जैसे चन्दन हो ...

अब इससे ज्यादा तारीफ क्या हो सकती है ....

:))

और ये आपकी आवाज़ ......

उफ्फ्फ........

वक़्त ने आपके साथ बहुत नाइंसाफी की आपको तो कहीं और होना चाहिए था .....

हाँ इस बार डूब कर गाया जो पिछली बार कमी लगी थी ...

आपकी आवाज़ का दर्द आकर्षित करता है ....

सुमन'मीत' ने कहा…

mann vibhor ho gya ......aapki aawaj me sunna achchha lga...

Rajeev Panchhi ने कहा…

Dear Rajendra ji...

What a beautiful poem you write!
Really amazing creation. Nice to read you (your poems, your GAZALs..You're just amazing)

I congratulate you.

हरकीरत ' हीर' ने कहा…

तुम 'देवी' मैं मानव .....
उफ्फ....
अर्धांगिनी को सम्मान देना तो कोई आपसे सीखे ...
पत्नी अपने पति से जरा सा सम्मान पा सारे दर्द भूल जाती है ....
खुशनसीब है वो .....

prritiy---------sneh ने कहा…

ek khoobsurat rachna ko achha swar pradaan kiya hai. aapko badhai. saath hi tasveer bhi sunder lagai hai, stri ke sunder roopon ki.

achhi lagi sampoorna kriti, swar..

shubhkamnayen

prritiy---------sneh ने कहा…

ek khoobsurat rachna ko achha swar pradaan kiya hai. aapko badhai. saath hi tasveer bhi sunder lagai hai, stri ke sunder roopon ki.

achhi lagi sampoorna kriti, swar..

shubhkamnayen

ज्योति सिंह ने कहा…

aapki rachna padhkar man me aadar bhav jaag utha ,swar ne ise aur nikhar diya .uttam .vichar to dev tulya hai aapke .

Ravi Srivastava ने कहा…

samvednaaon se labaalab bhara hua sagar jaisa blog... aisa mujhe laga. bahut sunder.....

Mridula Harshvardhan ने कहा…

sunder kriti
par khud se itna aprem kyun?

abhaar

Naaz

ramadwivedi ने कहा…

डा. रमा द्विवेदी

आदरणीय राजेन्द्र स्वर्णकार जी ,
आपका सस्वर गीत सुना.... अति सुन्दर शब्द और धुन ....अभिभूत हूं सुनकर | बहुत सराहनीय कार्य किया है आपने गीत के साथ सुन्दर सुन्दरियों के चित्र डाल कर ...मन मोहित हो गया | सुन्दर गीत के लिए अनंत शुभकामनाएं .....

अनुपमा त्रिपाठी... ने कहा…

komal si ..bahut sunder rachna ...
badhai evam shubhkamnayen.

Saru Singhal ने कहा…

Your blog is like a treasure. Loved visiting it:)

nutan ने कहा…

ati sundar..! Aabhaar!

Rajesh Kumari ने कहा…

rajendra ji aap lagta hai aaj kal bahut vyast rahne lage hain jo humare blog ki yaad hi nahi aati.

अल्पना वर्मा ने कहा…

अति सुन्दर!
सुंदर सरल शब्दों में बंधा गीत अच्छा लगा.
आप के स्वर में गीत को सुनना सुखद रहा.
चित्र चयन लाजवाब.सभी चित्रों में नायिका की आँखें बोलती हैं.चित्रकार का नाम क्या है?
आभार.

स्वाति ने कहा…

madhur kavita...madhur chitra...
utsahwardhan ke liye bahut bahut dhanywad sir....

आशा ने कहा…

बहुत सुन्दर भाव लिए रचना |
कभी मेरे ब्लॉग पर भी आएं |
आशा

सतीश सक्सेना ने कहा…

अपनी अभिव्यक्ति में कामयाब बेहद खूबसूरत गीत के लिए बधाई राजेंद्र भाई !!

सुरेन्द्र सिंह " झंझट " ने कहा…

'तुम देवी हो......... मैं मानव हूँ '

भाई राजेन्द्र जी
सप्रेम अभिवादन
आपका प्यारा गीत पढ़कर आनंद आ गया और सुनकर तो क्या कहना...
आप कलम और कला के धनी रचनाकार हैं , बहुत ख़ुशी होती है ब्लॉग पर आपसे रूबरू होकर ...

Babli ने कहा…

ख़ूबसूरत चित्रों से सुसज्जित लाजवाब और मधुर गीत लिखा है आपने ! अनुपम प्रस्तुती !
राखी की हार्दिक बधाइयाँ और शुभकामनायें!

Kailash C Sharma ने कहा…

कोमल अहसासों का सजीव चित्रण...भावों और शब्दों का सुन्दर संयोजन...लाज़वाब प्रस्तुति..

Sunil Kumar ने कहा…

बहुत सुन्दर गीत .....

Madhu Tripathi ने कहा…

यह गीत आपके ह्रदय के अनछुए भावो का प्रदर्शन है एवं आपकी आवाज सरस्वती का वरदान है
विद्या बुद्धिका अनूठा संगम जिसकी तारीफ शब्दों में नहीं की जा सकती

मधु त्रिपाठी MM
tripathi873@gmail.com
http://kavyachitra.blogspot.com

M VERMA ने कहा…

लाजवाब
और फिर आपका सुमधुर स्वर क्या कहने
अनूठा

अजय कुमार झा ने कहा…

सुंदर चित्रों के संयोजन ने तो प्रस्तुति में चार चांद लगा दिए हैं राजेंद्र जी । आपको पढना कहीं भीतर अपने दिल को टटोलने जैसा अहसास कराता है । बहुत खूब , बहुत ही बढिया