ब्लॉग मित्र मंडली

14/2/11

प्रेम बिना निस्सार है यह सारा संसार


होगा किसी के लिए आज का दिन विशेष
अपने लिए तो है
बारह मास बसंत
संत सभी फ़रमा गए – प्रेम जगत का सार !
प्रेम बिना निस्सार है यह सारा संसार !!
यह सारा संसार ; न अवसर कोई चूको !
प्रेम करो जी भर के , जो होना है सो हो !!
प्रेम पुजारी के लिए बारह मास बसंत !
प्रेम के बदले प्रेम लो , रहो संत के संत !!
राजेन्द्र स्वर्णकार
(c)copyright by : Rajendra Swarnkar

अजी किसने रोका है ? हमेशा प्यार मोहब्बत से रहिए न !
      
प्रेम में कंजूसी क्यों
प्रेम प्रदर्शन के लिए , नहीं मात्र दिन एक !
हर दिन हर पल कीजिए , अगर इरादे नेक !! 
अगर इरादे नेक ; प्रेम में कंजूसी क्यों ?
रहे वर्ष भर गफ़लत या बेपरवाही क्यों ?!
 प्रतिदिन पूछो प्रेम से कुशल सभी की क्षेम !
क्यों करते हो फरवरी चौदह को ही प्रेम ?!
राजेन्द्र स्वर्णकार
(c)copyright by : Rajendra Swarnkar
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 किशोर-युवापीढ़ी से संवाद करती ये दोनों कुंडलियां
पसंद आई होंगी आपको
आज कुछ रस परिवर्तन हो जाए !

 जहां छंदबद्ध गीत ग़ज़ल तीन हज़ार से अधिक लिख दिए मैंने
वहीं छंदमुक्त कविताएं 150-200 से अधिक नहीं लिखी होंगी
अब एक छंदमुक्त कविता भी प्रस्तुत है
आपकी परख कसौटी प्रतिक्रिया के लिए
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नहीं कर सकता मैं तिरस्कार या अनादर तुम्हारा

प्लीज़ 
अब तुम मुझे
 और एस एम एस मत भेजना 
भर गया है इनबॉक्स
शुरु से आख़िर तक तुम्हारे ही संदेशों से
नया मैसेज पढ़ने के लिए
मैं नहीं कर पाऊंगा 
इनमें से एक भी मैसेज डिलीट 
…बहुत प्यार से भेजे हैं न तुमने…
मुझ पर बेवफ़ाई का इल्ज़ाम न लग जाए कहीं 
नहीं कर सकता मैं तिरस्कार या अनादर तुम्हारा 
न ही तुम्हारी भावनाओं की उपेक्षा 
किसी सूरत में नहीं 
कभी नहीं 
… जागते हुए क्या … नींद में भी नहीं
राजेन्द्र स्वर्णकार
(c)copyright by : Rajendra Swarnkar

आप सबके स्नेह सहयोग और प्रतिक्रियाओं से ही मिलती है
निरंतर श्रेष्ठ करते रहने की ऊर्जा और प्रेरणा
मुझे
 indicator_32indicator_32indicator_32indicator_32indicator_32indicator_32indicator_32indicator_32indicator_32indicator_32indicator_32indicator_32indicator_32indicator_32indicator_32
*  हैडर के पास लगी पेंटिंग बचपन में बनाई हुई है  *
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अगली बार
कुछ और बासंती
 शब्द स्वर रंग 

68 टिप्‍पणियां:

sushant jain ने कहा…

Dohe or kavita dono bahut hi pasand aye...

गिरिजा कुलश्रेष्ठ ने कहा…

राजेन्द्र जी आपने मेरे ब्लाग पर आकर रचनाओं के लिये जो लिखा है उसके लिये धन्यबाद कह कर आपके शब्दों का महत्त्व कम न करूँगी ।
आपकी प्रेम कविता, सरस्वती-वन्दना , गजल ..आदि कुछ रचनाएं पढी ।अच्छी लगीं । समय मिलने पर और भी देखूँगी ।

डॉ. नूतन डिमरी गैरोला- नीति ने कहा…

बहुत सुन्दर रचना यही है सत्य सार प्रेम का... प्रदर्शन का नहीं..
और पेंटिंग तो उम्दा बनायी आपने बचपन में... काबिले तारीफ़ ...

राज भाटिय़ा ने कहा…

सुंदर चित्र से सजी सुंदर रचना मन भावन, धन्यवाद

Mayank Bhardwaj ने कहा…

मजा आ गया आज की पोस्ट को पढकर आभार
वैलेंटाइन डे स्पेशल जिंदगी है छोटी हर पल मे खुश हुं

माणिक ने कहा…

PADH KAR ACHCHAA LAGA.

दर्शन कौर धनोए ने कहा…

राजेंद्र जी,सचमुच प्यार का कोई दिन नही होता --यदि दिल खुश हे तो हर दिन होली हर रात दिवाली ! सुंदर कविता के लिए बधाई |

दीप्ति शर्मा ने कहा…

waah kya bat hai
bahut sunder varnan kiya hai aane
pram ka
aabhar

Deepak Saini ने कहा…

आपकी कविताओ की तो बात ही निराली है चाहे छंदबद्ध हो या मुक्त
पेटिंग अच्छी लगी
शुभकामनाये

ehsas ने कहा…

आप जैसे बहुआयामी प्रतिभा का व्यक्तित्व विरले ही मिलता है।

Atul Shrivastava ने कहा…

सचमुच, प्‍यार को किसी एक दिन के लिए, किसी दायरे में बांधना ठीक नहीं। प्‍यार तो हमेशा के लिए है।
अच्‍छी रचना। दिल को छू गई।
प्रेम को लेकर मेरी एक पोस्‍ट पर नजर डालें और अपने विचार वहां रखें तो अच्‍छा लगेगा।

यशवन्त माथुर ने कहा…

बहुत अच्छा लगा पढ़ कर


सादर

हरकीरत ' हीर' ने कहा…

.................
..............
.............

शुभकामनाये.....!!

Anupriya ने कहा…

ANDAAJ BADLE HUE HAIN AAJ...VALENTINE'S DAY KAA ASAR HAWAON MEN HAI...
bahut pyari rachnaye hain.
thanks.
:)

निर्मला कपिला ने कहा…

बचपन मे इतनी सुन्दर तस्वीरें बनाते थे आप? भाव और तस्वीरें बहुत सुन्दर हैं शुभकामनायें।

वन्दना ने कहा…

छा गये जी फिर चाहे दोहे कहे हों या कविता…………गज़ब के भाव भरे हैं …………हर भाव प्रेममय्।

: केवल राम : ने कहा…

सब गजब भाई ....आपको बधाई

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

बहुत सुन्दर कवितायें।

सदा ने कहा…

बहुत ही सुन्‍दर प्रस्‍तुति ।

इमरान अंसारी ने कहा…

राजेंद्र जी,

मुहब्बत का शानदार तोहफा....बहुत सुन्दर.....सबसे ज्यादा आपकी तस्वीर पसंद आई जो सबसे ऊपर लगाई है आपने......बहुत ही अच्छी लगी.....हैट्स ऑफ

सुशील बाकलीवाल ने कहा…

सभी कुछ उम्दा...!

सरजी कल मैंने आपसे एक निवेदन भी किया था. उम्मीद करुं पूरा होने की ?

रंजना ने कहा…

पते की बात कही है आपने...बस समझने की आवश्यकता है...aur क्या...

कलम आपकी मंजी हुई है..उसमे से जो भी निकलेगी तराशी हुई ही होगी...

ताऊ रामपुरिया ने कहा…

बहुत लाजवाब, शुभकामनाये.

रामराम.

Kailash C Sharma ने कहा…

प्रेम के सही रूप को चित्रित करती कुंडलियों का कोई ज़वाब नहीं..हमेशा की तरह बहुत सुन्दर..

छंदमुक्त कविता भी बहुत सुन्दर..आपके ब्लॉग पर आकार मन प्रफुल्लित हो जाता है..मेरे ब्लॉग पर आकर प्रोत्साहन के लिए आभार

डॉ टी एस दराल ने कहा…

यह लव ट्रेज़र अब तक कहाँ छुपा रखा था ।
पेंटिंग , चित्र , कुण्डलियाँ और छंद मुक्त कविता ---सब के सब प्रेम में लबालब ।
भई वाह , क्या कहने ।

sandhya ने कहा…

सचमुच प्यार का कोई दिन नही होता...बहुत अच्छी प्रस्तुति..शुभकामनायें.......

JHAROKHA ने कहा…

aadarniy rajendra ji
bahut hi khoob surat shabdo ke saath aapne aapne prem ki sahi vyakhya ki hai.vastav me har din apne aap me hi visheshh hota hai fir kisi ke liye koi ek hi din khass kyon?
aapki lekhni ke baare me kuchh bhi kahna kam hi hoga .nischit hi aapki lekhan me maa saraaswati ka varad -haast hai.
aapko dhero hardik subh-kamnaayen
Han! idhar sawasthy kaffi gad bad tha. isi liye net par nahi aa pa rahi thi .abhi bhi purdtah swasth nahi hun ,fir bhi dhire dhire aap sabhi ke blogo tak pahunchne ki kosshish kar rahi haun.jyada der baithna mana hai .isliye aaj kal bas thodi hi der net par aati hun.
itne dino se na aa sakne ke liye xhma chahati hun.
sadar abhinandan
poonam

Bhushan ने कहा…

प्रेम के बदले प्रेम दो ऐसा कह गए संत.

पंख ने कहा…

dono hi rachnaye bohot pyari hai.... padte waqt apne aap hooth muskurane lagte hai........ :)

पंख ने कहा…

aur haa... ye to aapke blog ki screen par jo mouse le jate hi sitare barasne lagki hai ki wo bohot acche lage.... loved it :)

कौशलेन्द्र ने कहा…

हम तो एस.एम.एस. भेजते रहेंगे राजेन्द्र भाई ! एक काम किया जा सकता है ......इन्हें दिल के किसी कोने में ट्रांसफ़र किया जा सकता है .....ताकि इनबाक्स सदा प्यासा ही रहे .......कभी-कभी यह बेहद ज़रूरी हो जाता है ......

Kunwar Kusumesh ने कहा…

प्रेम प्रदर्शन के लिए , नहीं मात्र दिन एक !
हर दिन हर पल कीजिए , अगर इरादे नेक !!

बहुत सही कहा आपने इस खास मौक़े पर.
valentine day पर तीनों कवितायें एक से बढ़कर एक.

sagebob ने कहा…

राजेन्द्र जी,आप की तीनों रचनाएँ आप ही तरह बेमिसाल हैं.
पेंटिंग का भी जवाब नहीं.
आप की कलम को तहे दिल से सलाम.

ali ने कहा…

चलिये हमारी ओर से आज के दिन के साथ साथ आगे के ३६४ दिनों के लिए अग्रिम प्रेमपगी शुभकामनायें :)

Suman Sinha ने कहा…

12 maas basant ho yaa ho patjhad
kahna hai ... happy valentine !

सुरेन्द्र सिंह " झंझट " ने कहा…

adarniy rajendra ji,
kundaliyan bahut manmohak ..
sab kuchh to badhiya laga!
bahut-bahut aabhar.

Khare A ने कहा…

shaandar Sant or prem ka sangam

maja aaya

ज्ञानचंद मर्मज्ञ ने कहा…

प्रेम पुजारी के लिए बारह मास बसंत ,
प्रेम के बदले प्रेम लो रहो संत के संत !
हर दोहा प्रेम की चासनी में पगा हुआ है !
ये दोहे सिद्ध करते हैं कि लिखने वाले के दिल में प्रेम का अथाह सागर भरा है !
शुभकामनाएं !

varjya ने कहा…

राजेंद्र जी,आपने तो सबों को बसंती रंगों में रंग दिया .ह्रदय प्रफ्फुलित हो गया .आपकी बनाई कलाकृति तो सोने पर सुहागा है .आपको हार्दिक आभार और हार्दिक शुभकामना ..आप यूँ ही हमें आनंद प्रदान करते रहे

नीरज गोस्वामी ने कहा…

सच कहा आपने भाई जी...प्रेम प्रदर्शन के लिए सिर्फ चौदह फरवरी ही क्यूँ...पूरे जीवन के सारे पल क्यूँ नहीं?

नीरज

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ ने कहा…

राजेन्‍द्र भाई, सचमुच प्रेम बिना जग सूना।

---------
अंतरिक्ष में वैलेंटाइन डे।
अंधविश्‍वास:महिलाएं बदनाम क्‍यों हैं?

Anita ने कहा…

भाव पूर्ण व सार्थक अभिव्यक्ति !

amit-nivedita ने कहा…

very nice and lovely presentation of love.

S.M.HABIB ने कहा…

राजेन्द्र भैया,
शानदार कुण्डलिया हैं...
सादर...

anupama's sukrity ! ने कहा…

बहुत सुंदर कोमल भाव -
दोनों रचनाएँ भावपूर्ण हैं .

Asha ने कहा…

राजेन्द्र जी बहुत अच्छा और सही लिखा है आपने |बधाई
आशा

वृक्षारोपण : एक कदम प्रकृति की ओर ने कहा…

प्रेम के बिना सब कुछ निस्सार है
निरर्थक है
व्यर्थ है
जग-जगती को
बाँध सके
प्रेम में ही वह सामर्थ्य है॥


आपकी कवितायें बहुत ही सुन्दर है।

गायन की तो जितनी प्रशंसा की जाये कम है।
बहुत मधुर
झम्कृत करती हुई वाणी
तार-तार झनझना उठते हैं

कुछ अलग है आपका ब्लॉग
ला की पूर्णता है यहाँ
बिरले ही ऐसा संयोग होता है।



वृक्षारोपण : एक कदम प्रकृति की ओर

पृथ्वी के शोभाधायक, मानवता के संरक्षक, पालक, पोषक एवं संवर्द्धक वृक्षों का जीवन आज संकटापन्न है। वृक्ष मानवता के लिये प्रकृति प्रदत्त एक अमूल्य उपहार हैं। आइये हम एक वृक्ष लगाकर प्रकृति-संरक्षण के इस महायज्ञ में सहभागी बनें।



श्रीमती कुसुम जी ने पुत्री के जन्म के उपलक्ष्य में आम का पौधा लगाया

श्रीमती कुसुम जी ने पुत्री के जन्म के उपलक्ष्य में आम का पौधा लगाया है।
‘वृक्षारोपण : एक कदम प्रकृति की ओर’ एवं सम्पूर्ण ब्लॉग परिवार की ओर से हम उन्हें पुत्री रूपी दिव्य ज्योत्स्ना की प्राप्ति पर बधाई देते हैं।

Minakshi Pant ने कहा…

सुन्दर चित्रों से सजी खुबसूरत रचना |

शिखा कौशिक ने कहा…

rajendra ji
aapko bhi basant ritu ki hardik shubhkamnaye .har rachna sundartam hai aapki .badhai .

Suman ने कहा…

rajendra ji,
bahut sunder hai sabhi rachnaye......

अमित शर्मा ने कहा…

.हमेशा की तरह बहुत सुन्दर..

कविता रावत ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रेममयी प्रस्तुति ... सच प्यार ही तो जीवन का सार है .... बस दिखावा न हो , इसे समझ लें इंसान तो फिर रोना काहे का !

Rajendra Swarnkar : राजेन्द्र स्वर्णकार ने कहा…

# सुशांत भाई, धन्यवाद ! एक दो दिन में मेल का जवाब दूंगा … ठीक है न ?

# गिरिजा कुलश्रेष्ठ जी , स्वागत !
मेरी पिछली पोस्ट्स भी पढ़ने के लिए आभार !
कहीं भी आपको मेरे लेखन से निराशा हो तो अवश्य बताइएगा …

# डॉ.नूतन जी , शुक्रिया !
हां, बचपन से ही कलाकारी के कीड़े कुलबुलाते रहे हैं रग़ों में :)

# राज भाटिया जी, बहुत बहुत आभार !

# मयंक जी, शुक्रिया !

# माणिक जी, आभार ! स्नेह बनाए रहें …

# दर्शन भाभीजी, प्रणाम !
प्रोफाइल पर इतनी ख़ूबसूरत तस्वीर देख कर मन मोर हुआ मतवाला … :)

# दीप्ति जी, आभार ! आएं फिर …

# दीपक जी, पसंद करने के लिए आभार !

# अमित जी 'एहसास', आपका प्यार मुझे प्रोत्साहन देता है … Thanks

# अतुल श्रीवास्तव जी , अवश्य आऊंगा आपके यहां भी …
अरे ! मैं आ चुका … आता रहूंगा फिर भी … :)

# यशवंत जी, बहुत बहुत आभार !

Rajendra Swarnkar : राजेन्द्र स्वर्णकार ने कहा…

# हीर जी , …………………… आभार ! :)

# अनुप्रिया जी, हा ऽऽ हा ऽ ! हां, हवाओं में असर महसूस तो हो रहा है … :) Thanks a Lot …

# निर्मला मौसी जी , प्रणाम !
यह तस्वीर चौदह साल का था तब की है … नीचे बांये कोने में राजू नाम लिखा है ।
आशीर्वाद है आपका !

# वंदना जी, आपका स्नेह अभिभूत करता है । प्रणाम !
हां, आपको शुभविवाह की 23वीं वर्षगांठ के अवसर पर पुनः बहुत बहुत बधाई !

# केवल जी, आभार !

# प्रवीण जी, हृदय से आभार !

# सदा जी, शुक्रिया ! फिर अवश्य आइएगा …

# इमरान भाई, आपका प्यार मेरे लिए बहुत क़ीमती है …
हमेशा इतना प्रोत्साहित करते हैं … Love You

# सुशील जी , प्रणाम ! आपसे बात करके बहुत अच्छा लगा ।
अब तो मेल मिल ही चुकी आपको…
आपके गीत का इंतज़ार रहेगा पोस्ट पर अब :)

# रंजना जी , आपका स्नेह आशीर्वाद प्रोत्साहन बना रहे ,
यही मेरी दौलत और श्रेष्ठ करने की प्रेरणा है … हर्दिक आभार !

# ताऊ जी , प्रणाम ! आप वैसे दृष्टिगत न हों चाहे …
घर आ'कर आशीष दे देते हैं तो सेर ख़ून बढ़ जाता है … रामराम !

# दराल जी , प्रणाम !
हाऽऽह ऽ हा … मां सरस्वती की असीम कृपा है , आपकी दुआएं हैं … मेरा क्या है ?

# संध्या जी , सच है … सच्चे प्यार के भाव तिथि वार दिवस देख कर हृदय में जाग्रत नहीं होते
… स्वतःस्फूर्त होते हैं … आभार ! आइएगा फिर …

Rajendra Swarnkar : राजेन्द्र स्वर्णकार ने कहा…

# पूनम जी, पिछली पोस्ट्स पर आपका इतना ज़्यादा इंतज़ार रहा … क्या बताऊं ?
अब स्वास्थ्य कैसा है ?
कृपया, घर-परिवार सम्हालने के साथ अपने स्वास्थ्य का भी पूरा ध्यान रखा करें ।
आप जैसी गृहिणियां पूरे परिवार का ध्यान रखती हैं, बस अपने स्वास्थ्य के प्रति ही लापरवाह होती हैं ।

…और आप इतनी प्रशंसा करती हैं कि लगता है ख़ज़ाना मिल गया … :) कृतज्ञ हूं !

# भूषण जी , सच है जो मिल गया वह तो लौटाओ !

# श्वेता जी , आपकी मुस्कुराहट हमेशा बनी रहे … आमीन !
इतनी बारीकी से परखने-पसंद करने के लिए हार्दिक आभार !
प्रोत्साहन के दो शब्द बहुत बड़ी दौलत हुआ करते हैं …

# कौशलेन्द्र जी, हां, आपकी सलाह तो बहुत काम की है… :)
स्वागत ! प्यार मोहब्बत SMS का सिलसिला बना रहे …

# कुसुमेश जी , आप जैसे प्यारे इंसान , गुणी रचनाकार और समर्थ पारखी का कुछ भी कहना …
और भी श्रेष्ठ करने की प्रेरणा देता है । आभार !

# सैगबॉब जी ( अपना पूरा परिचय दीजिए न ! )
… यानी हम भी बेमिसाल ! हाऽऽ ह ह हाऽऽ … ज़र्रानवाज़िश का शुक्रिया !
प्यार बनाए रहें …

# अली भाईजान , आपने तो झोली भर दी हमारी प्रेम के मोतियों से …
आभार !

# सुमन सिन्हा जी, स्वागतम् ! :) happy valentine !

# सुरेन्द्र सिंह जी, आपका गुण मुझे आपका 'पंखा'( fan ) पहले ही बना चुका …
देर-सवेर का ख़याल न करें … बहुत बहुत आभार !

# खरे जी , आभार ! आइएगा …

# ज्ञानचंद जी, आभार ! हृदय में प्रेम बिना सृजन संभव नहीं …

# वर्ज्य जी , इतनी सुंदर प्रतिक्रिया के लिए हृदय से आभारी हूं ।
आप 'वर्ज्य नारी स्वर' तो नहीं , बात हुई है उनसे तो मेरी मेल माध्यम से भी …

कई ब्लॉग्स पर देखते हैं , फ़र्ज़ी ईमेल आईडी वाले कमेंट्स !
मेरे 1900 से अधिक कमेंट में यह आपका ही कमेंट है जिसकी प्रोफाइल में Profile Not Available लिखा आ रहा है ।
मैं कमेंट संख्या अधिक दिखाने के लिए ऐसी टुटपुंजिया हरकतें करने वालों पर हंसता हूं …
…………… पता नहीं हम पर भी कोई शक करे तो …
आपसे विनम्र अनुरोध है आप तक पहुंचने का हमें भी अवसर दीजिए न … प्लीज़ !

Rajendra Swarnkar : राजेन्द्र स्वर्णकार ने कहा…

# नीरज जी, आभार आपका भाई जी!

# ज़ाकिर भाई, आदाब ! शुक्रिया !

# अनिता जी, नमन ! आपकी सदैव आशीष मिलती रहे …

# अमित-निवेदिता जी, शुक्रिया ! आगे भी आइएगा …

# हबीब जी, शुक्रिया …

# अनुपमा जी, हार्दिक आभार !

# आशा अम्मा जी, आपका आशीर्वाद मिलता रहे …

# वृक्षारोपण , आपका आभार ! इतनी तारीफ़ के लिए शुक्रिया ! हार्दिक कृतज्ञता ! ( आपसे कुछ कहना है, अपनी मेल आईडी से मेल करें … )

# मीनाक्षी जी, बहुत बहुत आभार !

# शिखा कौशिक जी, आभार ! धन्यवाद !

# सुमन जी, तहे-दिल से शुक्रिया !

# अमित भाई, आभारी हूं …

# कविता रावत जी, प्रणाम ! बहुत सही कहा आपने भी …
हार्दिक आभार !

Akshita (Pakhi) ने कहा…

यह तो बहुत सुन्दर लिखा आपने....बधाई.


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'पाखी की दुनिया' : इण्डिया के पहले 'सी-प्लेन' से पाखी की यात्रा !

Mrs. Asha Joglekar ने कहा…

राजेन्द्र जी प्रेम से सराबोर आपकी गेय और अगेय दोनो ही रचनाएँ लाजवाब । सही कहा प्रेम के लिये तो पूरी उम्र भी काफी नही फिर एक दिन से क्या होगा । चित्र भी सुंदर ।

Indranil Bhattacharjee ........."सैल" ने कहा…

राजेंद्र जी,
कुण्डलियाँ और मुक्तछंद कि कवितायेँ दोनों बेहतरीन है ... मज़ा आ गया पढकर ...
Valentine Day पर आपका यह सुन्दर कोमल भाव और सन्देश मन को भा गए ...

Rajey Sha ने कहा…

हैडर के पास लगी पेंटिंग आपके बच्पन के रंगीन दि‍नों को दि‍खाती है।
स्‍त्री नमन करती हमारी एक रचना http://rajey.blogspot.com/ पर

शारदा अरोरा ने कहा…

स्वर्णकार जी स्नेहभरी टिप्पणी के लिए धन्यवाद
आपने लिखा बचपन के कुछ खेल भी याद हो आए …
हरा समंदर
गोपी चंदर
बोल मेरी मछली कितना पानी ?
इत्ता पानी , इत्ता पानी ...कहाँ कोई नाप सका है इस समंदर का पानी ...बस डूबने के लिए ज्यादा ही मांगता रहा ...पढ़ कर अच्छा लगा कि आपकी किताबें भी प्रकाशित हुईं ..बधाई ..

Anjana (Gudia) ने कहा…

Rajendra ji,

Namaste,

Bahut sunder post hai!

Rajendra Swarnkar : राजेन्द्र स्वर्णकार ने कहा…

# प्यारी प्यारी राजकुमारी बिटिया अक्षिता जी ( पाखी ), बहुत बहुत आशीर्वाद ! बहुत शीघ्र आऊंगा आपके यहां …

# आदरणीया आशा जोगलेकर जी , प्रणाम ! बहुत आभारी हूं …

# इंद्रनील जी , आपके आने से उत्साह बढ़ा है , ख़ुशी हुई है … आभारी हूं !
मैं तो बहुत सुस्त हूं … मेरी बराबरी न करें आने में :)

# राजेय शा जी, आपके आने से बहुत प्रसन्नता हुई ।
हा ऽऽ हा ! बचपन के रंगीन दिन … क्या याद दिला रहे हैं सर … :) आते रहें कृपया !

# शारदा अरोरा जी , प्रणाम ! बहुत अच्छा लगा आपके आने से …
हां , किताबें पांच और प्रकाशन के लिए तैयार है …
कोई ढंग का प्रकाशक मिले तो सही , जो रचनाकार का ख़ून न चूसने वाला हो …

# अंजना जी गुड़िया , शुक्रिया ! आइएगा फिर …

इस्मत ज़ैदी ने कहा…

नहीं कर सकता मैं तिरस्कार या अनादर तुम्हारा
न ही तुम्हारी भावनाओं की उपेक्षा
किसी सूरत में नहीं

बहुत सुंदर भावनाओं का उत्कृष्ट प्रस्तुतिकरण
प्रेम का यही रूप सत्य है ,शेष तो सब मिथ्या है

रजनी मल्होत्रा नैय्यर ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रेममयी प्रस्तुति ...

प्रेम प्रदर्शन के लिए , नहीं मात्र दिन एक !
हर दिन हर पल कीजिए , अगर इरादे नेक !!

बहुत सही कहा आपने .....

राजेश सिंह ने कहा…

संसार का सार समझने का बढि़या प्रयास, शुभकामनाएं.

expression ने कहा…

बहुत प्यारी पोस्ट....
इस बरस की पहली टिप्पणी हमारी है...
प्यारी रचनाएं....
एकदम ताज़ा ताज़ा आज भी...

सादर
अनु

Shalini Rastogi ने कहा…

प्रेम के रंग में पगी इक ताजातरीन रचना ... बहुत ही सुन्दर !