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21/11/11

दरिया से न समंदर छीन

                                                                    
आज प्रस्तुत है बिना भूमिका के
एक ग़ज़ल



दरिया से न समंदर छीन
दरिया से न समंदर छीन
मुझसे मत मेरा घर छीन
क्यों उड़ने की दावत दी
ले तो लिये पहले पर छीन
मंज़िल मैं ख़ुद पा लूंगा
राह न मेरी रहबर छीन
मिल लूंगा उससे , लेकिन
पहले उससे पत्त्थर छीन
देख ! हक़ीक़त बोलेगी
हाथों से मत संगजर छीन
लूट मुझे ; मुझसे मेरा
जैसा है न सुख़नवर छीन
बोल लुटेरे ! ताक़त है ?
मुझसे मेरा मुक़द्दर छीन
मालिक ! नज़र नज़र से अब
ख़ौफ़ भरे सब मंज़र छीन
राजेन्द्र हौवा तो नहीं
लोगों के मन से डर छीन
- राजेन्द्र स्वर्णकार
©copyright by : Rajendra Swarnkar


आप सबके लिए दुआएं हैं 
सदा ख़ुश-ओ-आबाद रहें 
आमीन


64 टिप्‍पणियां:

रंजना [रंजू भाटिया] ने कहा…

बहुत सुन्दर बेहतरीन

रश्मि प्रभा... ने कहा…

waah...

महेन्द्र मिश्र ने कहा…

सुन्दर रचना ..आभार

सदा ने कहा…

बेहतरीन प्रस्‍तुति ।

वन्दना ने कहा…

आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
प्रस्तुति आज के तेताला का आकर्षण बनी है
तेताला पर अपनी पोस्ट देखियेगा और अपने विचारों से
अवगत कराइयेगा ।

http://tetalaa.blogspot.com/

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

बेहतरीन गज़ल ..

बोल लुटेरे ! ताक़त है ?
मुझसे मेरा मुक़द्दर छीन

कोई मुकद्दर नहीं छीन सकता

दिगम्बर नासवा ने कहा…

राजेन्द्र जी ... बहुत ही लाजवाब जबरदस्त गज़ल है ... चौकाने वाले शेर हैं ... एक से पढ़ के एक ...

S.M.HABIB (Sanjay Mishra 'Habib') ने कहा…

बोल लुटेरे ताकत है.
मुझसे मेरा मुकद्दर छीन....

वाह वाह आदरणीय राजेन्द्र भईया...
बहुत ही सूंदर/सार्थक ग़ज़ल...
सादर बधाई....

mridula pradhan ने कहा…

bahut sunder likhe......

सुमन'मीत' ने कहा…

बहुत खूबसूरत ....

Amrita Tanmay ने कहा…

बढ़िया लिखा है.

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

बेहतरीन अभिव्यक्ति।

कुश्वंश ने कहा…

राजेंद्र जी एक बेहतरीन ग़ज़ल से नवाज़ा है आपने अपना ब्लॉग , ब्लॉग पर आकर साहित्य का बेहतरीन स्वाद मिलता है आपकी कलम यूं ही उत्क्रिस्ट साहित्य रचती रहे शुभकामनाये

Pallavi ने कहा…

Malik Nazar-Nazar se Ab Khoff Bhara Manzar cheen waah... kasha aapki yh bat sach ho jaay...aur duniya men har ek nazar se yh khoff ka manzar chin jaay sarthak rachna

Minakshi Pant ने कहा…

बहुत खूब |

डा. अरुणा कपूर. ने कहा…

बहुत सुन्दर गजल!...

रेखा ने कहा…

शानदार और प्रभावी गजल ..

अरुण चन्द्र रॉय ने कहा…

लाजवाब ग़ज़ल... बहुत गहरे भाव... अदभुद...

डॉ टी एस दराल ने कहा…

सुन्दर ग़ज़ल के साथ जो तस्वीर आपने लगाई है वह ग़ज़ल में चार चाँद लगा रही है ।
बहुत बढ़िया राजेन्द्र भाई ।

अनुपमा पाठक ने कहा…

बोल लुटेरे ! ताक़त है ?
मुझसे मेरा मुक़द्दर छीन
बहुत खूब!

नीरज गोस्वामी ने कहा…

भाई जी नया रदीफ़ ढूंढ के लाये हैं और क्या खूब निभाया है...जय हो

नीरज

संतोष कुमार ने कहा…

बहुत ही सुंदर रचना !

sushila ने कहा…

"मालिक नज़र-नज़र से अब
खौफ़ भरे सब मंज़र छीन"

वाह भाई सा ! नेक खयाला लिये बेहतरीन गज़ल ।

dheerendra ने कहा…

राजेंद्र जी,
आपने लाजबाब गजल लिखी है,इसमें कोई
शक नहीं साथ ही खुबशुरत चित्र ने गजल में
चार चाँद लगा दिए,बधाई....
मेरे नए पोस्ट आइये स्वागत है,....

आशा ने कहा…

अच्छी गजल के लिए बधाई |
आशा

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा कल मंगलवार के चर्चा मंच पर भी की जा रही है!
आपके ब्लॉग पर अधिक से अधिक पाठक पहुँचेंगे तो चर्चा मंच का भी प्रयास सफल होगा।

Deepak Saini ने कहा…

हमेशा की तरह शानदार रचना

विशाल ने कहा…

राजेन्द्र भाई,
बहुत ही खूबसूरत ग़ज़ल है.
आपकी कलम की रवानगी को सलाम .

एक ग़ज़ल 'मत छीन' पर भी हो जाए.

NISHA MAHARANA ने कहा…

बेहतरीन प्रस्‍तुति ।

sushma 'आहुति' ने कहा…

bhaut hi behtreen gazal.....

रंजना ने कहा…

बोल लुटेरे!!! ताकत है??

मुझसे मेरा मुकद्दर छीन...

बस, वाह...वाह...वाह...

और क्या कहूँ...

मनीष सिंह निराला ने कहा…

बहुत खूब हर शेर उम्दा !
मेरी नई पोस्ट पे आपका हार्दिक स्वागत है !

दिलबाग विर्क ने कहा…

बेहतरीन गज़ल

mahendra verma ने कहा…

बोल लुटेरे, ताकत है
मुझसे मेरा मुकद्दर छीन।

वाह, क्या शानदार शेर है।
कमाल की ग़ज़ल है,
बहुत अच्छी लगी।

सागर ने कहा…

राजेन्द्र जी ... बहुत ही लाजवाब जबरदस्त गज़ल है.... सादर आभार....

Ratan Singh Shekhawat ने कहा…

लाजबाब प्रस्तुति

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ajit gupta ने कहा…

लोगों को भय मुक्‍त नहीं अपितु भय युक्‍त करने का प्रयास चल रहा है।

Ghanshyam Maurya ने कहा…

Fantastic!

shashi purwar ने कहा…

बहुत ही सुंदर गजल .......मन को अभिभूत .....रमती हुयी .....अत्ति सुंदर .बहुत ही पसंद आई ..!


आपका धन्यवाद आपने याद किया . आपका आशीर्वाद सदैव बना रहे .....आपके कहने पर आज मैंने भी गजल पोस्ट की है ........मार्गदर्शन की अपेक्षा है .धन्यवाद
sapne-shashi.blogspot.com

prritiy---------sneh ने कहा…

बोल लुटेरे ! ताक़त है ?
मुझसे मेरा मुक़द्दर छीन

bahut sunder rachna

shubhkamnayen

girish pankaj ने कहा…

राजेंद्र भाई,
कमाल कर देते हैं आप..जय हो...
''बोल लुटेरे ! ताक़त है ?
मुझसे मेरा मुक़द्दर छीन ''
दिल से निकली केवल वाह.. अच्छे शेर हुए हैं. एक से बढ़ कर एक. यही दर्शन, यही चिंतन चाहिए. परिवर्तन की दिशा में. शुभकामनाये...

Neelam ने कहा…

Loot mujhe; mujhse mera
jaisa hai na sukhnvar chheen
bol lutere! taakat hai?
mujhse mera muqaddar chheen... wah behadd umda likha hai Rajendra ji .

Prem lata ने कहा…

राजेन्द्र भाई ..बहुत सुंदर लिखते है आप ..बोल लुटेरे ताकत है?मुझसे मेरा मुकद्दर छीन" क्या चुनौती दी है ..शब्द नहीं मिल रहे हैं तारीफ़ के लिए!I am speechless...जियो

प्रेम लता ने कहा…

राजेंदर जी आपकी लेखनी में जादू है ...बहुत सुंदर ...बोल लुटेरे ताकत है ? मुझ से मेरा मुकद्दर छीन ...क्या चुनौती दी है ...मेरे शब्द काफी नहीं हैं आपकी गज़ल की तारीफ़ के लिए ..जियो

Navin C. Chaturvedi ने कहा…

वाह वाह वाह

छोटी बहर पर अद्भुत शब्दांकन, मज़ा आया। आखिरी दो शेर तो सीधे दिल् में उतर गए। बधाई।

परमेन्द्र सिंह ने कहा…

छोटी बहर में बड़ी खूबसूरती आपने अपनी बात कह दी है। सुन्दर ग़ज़ल केलिए बधाई !

ऋता शेखर 'मधु' ने कहा…

वाह!हमेशा की तरह उत्कृष्ट रचना...चित्र भी बहुत सुन्दर है...बधाई|

KAHI UNKAHI ने कहा…

बोल लुटेरे! ताकत है
मुझसे मेरा मुक़द्दर छीन...

क्या खूब...बधाई...।
प्रियंका गुप्ता

Deepak Shukla ने कहा…

Rajendra bhai..

Sabne hi chheena hai humse..
Jo bhi mere paas raha...
Par na humne kabhi kisi se..
Chheen lo aakar mujhe kaha..

Bahut sundar gazal..

Deepak Shukla..

प्रेम सरोवर ने कहा…

बहुत रोचक और सुंदर प्रस्तुति.। मेरे नए पोस्ट पर (हरिवंश राय बच्चन) आपका स्वागत है । धन्यवाद ।

अभिषेक ने कहा…

Aapne hamare blog par aakar hausla badaya, iske liye bahut bahut dhanywad. Aap ki rachnaye bahut acchi hai.

Reena Maurya ने कहा…

bahut hi khubsurat rachana hai..

मेरा साहित्य ने कहा…

chhin sake to mera mukaddar chhin kya bhav hai lajavab
ek ek sher tarif ke kabil hai
bahut bahut badhai
rachana

जयकृष्ण राय तुषार ने कहा…

सुन्दर गजल भाई राजेन्द्र जी |ब्लॉग पर आपकी टिप्पणियां भी बहुत दमदार होती हैं आभार |

जयकृष्ण राय तुषार ने कहा…

सुन्दर गजल भाई राजेन्द्र जी |ब्लॉग पर आपकी टिप्पणियां भी बहुत दमदार होती हैं आभार |

चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति

प्रेम सरोवर ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति है आपकी..। पढ़ना बहुत अच्छा लगा.।
समय मिलने पर मेरे ब्लॉग पर आईयेगा,। धन्यवाद ।

Maheshwari kaneri ने कहा…

बहुत ही खुबसूरत गजल...

Maheshwari kaneri ने कहा…

बहुत ही खुबसूरत गजल..

B.S .Gurjar ने कहा…

राजेंद्र हऊअ तो नहीं....बहुत उम्दा....

boletobindas ने कहा…

क्या गज़ल है मित्र..राह न मेरी रहबर छीन..मंजिल तो मैं पा लूंगा...बेहतरीन गज़ल ..... आपने खुद नहीं गाया शायद इसे ..इसलिए खुद ही गुनगुना रहा हूं....

Saurabh ने कहा…

दरिया से न समंदर छीन
मुझसे मत मेरा घर छीन .. .

और मुसलसल बढ़ता गया. बहुत बढिया. बधाई स्वीकारें.


कुछ हिज्जे संबन्धी दोष को दुरुस्त कर लिया जाता, भाईजी.

Rajendra Swarnkar : राजेन्द्र स्वर्णकार ने कहा…

आदरणीय सौरभ जी
आभार !
आप आए … अहोभाग्य !


# कुछ हिज्जे संबन्धी दोष को दुरुस्त कर लिया जाता, भाईजी.

अवश्य ! हिज्जे संबन्धी दोष कहां / क्या है बतलाने की कृपा करते …

श्रीप्रकाश डिमरी /Sriprakash Dimri ने कहा…

बहुत खूबसूरत गजल...आपको भी हार्दिक शुभ कामनायें ..सादर स्नेह पूर्ण अभिनन्दन