समझ नहीं पाया अगर… दोस्त , दोस्त का दर्द !
क्या हक़ है कहलाए वो , दोस्त , मीत , हमदर्द ?!
तेरे दिल में ये दर्द सा क्या है
मुझसे कहदे तू सोचता क्या है
मैं तेरा दोस्त , तू मेरा हमदम
ग़म न बांटें तो फ़ायदा क्या है
मुझको समझा है गर कभी अपना
मुझसे शरमाना - सोचना क्या है
अब रुलाने लगा है ग़म तेरा
हाले-दिल तू बता , हुआ क्या है
साथ हो दोस्त , फिर जहां क्या है
क्या है तक़दीर , फिर ख़ुदा क्या है
दोस्त ही दोस्त को न समझे फिर
बदनसीबी या हादसा क्या है
दोस्त ख़ुश हो जहां भी हो , रब्बा
और राजेन्द्र मांगता क्या है
मैं तेरा दोस्त , तू मेरा हमदम
ग़म न बांटें तो फ़ायदा क्या है
मुझको समझा है गर कभी अपना
मुझसे शरमाना - सोचना क्या है
अब रुलाने लगा है ग़म तेरा
हाले-दिल तू बता , हुआ क्या है
साथ हो दोस्त , फिर जहां क्या है
क्या है तक़दीर , फिर ख़ुदा क्या है
दोस्त ही दोस्त को न समझे फिर
बदनसीबी या हादसा क्या है
दोस्त ख़ुश हो जहां भी हो , रब्बा
और राजेन्द्र मांगता क्या है


