ब्लॉग मित्र मंडली

1/8/10

मैं तेरा दोस्त , तू मेरा हमदम



समझ नहीं पाया अगर… दोस्त , दोस्त का दर्द !
क्या हक़ है कहलाए वो , दोस्त , मीत ,  हमदर्द ?!
मैं तेरा दोस्त , तू मेरा हमदम
तेरे दिल में ये दर्द सा क्या है 
मुझसे कहदे तू सोचता क्या है 
मैं तेरा दोस्त , तू मेरा हमदम
ग़म न बांटें तो फ़ायदा क्या है 
मुझको समझा है गर कभी अपना 
मुझसे शरमाना - सोचना क्या है 
अब रुलाने लगा है ग़म तेरा 
हाले-दिल तू बता , हुआ क्या है 
साथ हो दोस्त , फिर जहां क्या है 
क्या है तक़दीर , फिर ख़ुदा क्या है 
दोस्त ही दोस्त को न समझे फिर
बदनसीबी या हादसा क्या है
दोस्त ख़ुश हो जहां भी हो , रब्बा 
और राजेन्द्र मांगता क्या है

-राजेन्द्र  स्वर्णकार 
©copyright by : Rajendra Swarnkar



विश्व मित्रता दिवस
पर
 हार्दिक शुभकामनाएं !
मंगलकामनाएं !!