ब्लॉग मित्र मंडली

11/1/11

ज़माना लुटेरा है आंसू ख़ज़ाना


ज़माना लुटेरा है आंसू ख़ज़ाना

हमें बात दिल की बता दीजिएगा
न ज़ख़्मों को ज़्यादा हवा दीजिएगा
अजी इस तरह मत सज़ा दीजिएगा
अगर दीजिए तो बजा दीजिएगा
यूं ग़म शौक़ से बारहा दीजिएगा
मगर रूठ कर मत सज़ा दीजिएगा
 कहा मानिएगा, कहा कीजिएगा
उदासी का आंचल हटा दीजिएगा
धुआं हद से ज़्यादा जो देने लगे; वो
चराग़ अपने हाथों बुझा दीजिएगा
ज़माना लुटेरा है आंसू ख़ज़ाना
जहां से ये दौलत छुपा दीजिएगा
- राजेन्द्र स्वर्णकार
(c)copyright by : Rajendra Swarnkar


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यहां सुनें मेरी धुन में मेरे शब्द मेरे स्वर में


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11111111111
अर्थात्
11 - 1 - 11   11 : 11 : 11
अर्थात्
वर्ष 11 के पहले महीने की 11वीं तारीख को
पूर्वाह्न के 11 बज कर कर 11 मिनट 11 सैकंड पर 
डाली गई इस पोस्ट के माध्यम से 
आपके लिए
11111111111 शुभकामनाएं !

और कल इस ब्लॉग की स्थापना के दस माह पूरे हुए ।
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आप सबके प्रति हार्दिक आभार !
स्नेह सहयोग सद्भाव बनाए रखिएगा

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