ब्लॉग मित्र मंडली

6/9/11

काव्य प्रतियोगिता में पुरस्कार

- मेरी रचना को द्वितीय पुरस्कार के लिए चुना गया -
रक्षक फ़ाउंडेशन , Santa Clara , California , United States. द्वारा
देशभक्ति-काव्य रचनाओं पर आधारित "गौरव गाथा" प्रतियोगिता का आयोजन 
कविताकोश के सहयोग से किया गया। 
प्रतियोगिता 22 जून 2011 से 31 जुलाई 2011 तक चली।
इस प्रतियोगिता में मैंने ये दो काव्य रचनाएं भेजीं
वहां सम्मिलित 173 काव्य प्रविष्टियों में से 
मेरी रचना के लिए घोषित हुआ है
द्वितीय पुरस्कार

प्रस्तुत हैं राष्ट्रभक्ति में डूबी मेरी दोनों रचनाएं
ख़ास आपके लिए
मेरी पाकीज़गी के दस्तख़त
मुहब्बत के तराने गुनगुनाती यां हवाएं हैं
नहीं इस घर में नफ़रत - बैर-सी बेजा बलाएं हैं

न झांको खिड़कियों से , 'के आंगन में कभी देखो
जहां सदियों से दुनिया के लिए जारी दुआएं हैं

पढ़े आवाम हर पल मंत्र बस इंसानियत के यां
दिगर गूंजे ख़ुलूसो-अम्न की पावन ॠचाएं हैं

मिसालें दे जहां , उस राम का इंसाफ़ ईमां है
लियेशाइस्तगी राधा-कन्हैया की अदाएं हैं

मेरी पाकीज़गी के दस्तख़त गंगो-जमन मेरे
मेरे किरदार की अज़मत हिमालय-शृंखलाएं हैं

मेरे देवालयों की घंटियों की गूंज जन्नत में
मुक़द्दस नामों की तारीफ़ यां हम्दो-सनाएं हैं

खड़े मिलते हैं पग-पग रूबरू ख़ुद देवता हाज़िर
सम्ते हर आरती-वंदन है , पूजा-अर्चनाएं हैं

जहां को इल्मो - फ़न की रौशनी बख़्शी है हमने ही
हमारे दम से महकी-मुस्कुराती सब दिशाएं हैं

मैं अपनी सरज़मीं की क्या करूं ता'रीफ़ ; नादां हूं
अगरचे मेरी रग-रग में वफ़ाएं ही वफ़ाएं हैं

मिले ता'लीम-रोज़ी ; भूख दहशत दासता मिट कर
जहां के वास्ते राजेन्द्र ये शुभकामनाएं हैं

राजेन्द्र स्वर्णकार 
©copyright by : Rajendra Swarnkar

मेरी बनाई धुन में मेरे स्वर में मेरी रचना
©copyright by : Rajendra Swarnkar
वंदे मातरम् !
उत्तप्त ध्वनि उ द् घो ष  वंदे मातरम् जय मातरम् !
उत्फुल्ल ध्वनि स द् घो ष  वंदे मातरम् जय मातरम् !

श्वास  वंदे  मातरम् ! उच्छ्वास  वंदे  मातरम् !!



मंत्र है पावन ॠचा है राष्ट्र का मन-प्राण है !

विहित  वंदे  मातरम्  में संस्कृति का त्राण है !

निहित  वंदे  मातरम्  में सृष्टि का कल्याण है !

जयति जय जय राष्ट्र !

वंदे  मातरम् !!

जय मातरम्  !!!

है हमारा कर्म यह हर कर्म का प्रतिफल यही !
स्नेह में सौहार्द है यह समर में संबल यही !
ओज है यह तेज है यह शौर्य शुचिता गर्व है !
बल भुजाओं का यही अधरों की स्मित-मुस्कान है !
राष्ट्र-हित सन्नद्ध जन का लक्ष्य है संधान है !!

सभ्यता-संस्कृति न अंगद-पांव-सी टस मस हुई !
शिवत्व के संस्पर्श से ज्योतित स्वयं कल्मष हुई !
पुण्य शाश्वत् यश चिरंतन पथ सनातन श्रेष्ठतम ;
नित्य अपराजेय अक्षुण्ण आत्मभू अभिमान है !
अनवरत् उत्कर्ष अरुणिम अभ्युदय उत्थान है !!

शूरवीर प्रताप ना बिसराएं  वंदे  मातरम् !
लक्ष्मी दुर्गा शिवाजी गाएं  वंदे  मातरम्  !
भगतसिंह सुखदेव बिस्मिल राजगुरु आज़ाद की ,
और...  हेडगेवार  सावरकर सभी की जान है !
मातृ-सुत बंकिम की वंदे  मातरम् पहचान है !!

जयति भारतवर्ष !
वंदे मातरम् !! 
जय मातरम्  !!!
- राजेन्द्र  स्वर्णकार
©copyright by : Rajendra Swarnkar

मेरी बनाई धुन में मेरे स्वर में मेरी रचना
©copyright by : Rajendra Swarnkar
आपकी बधाइयां सहर्ष साभार स्वीकार हैं
 दोनों रचनाएं पढ़-सुन कर 
मूल्यांकन अवश्य करें 
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गौरव गाथा प्रतियोगिता परिणाम


इस बीच शस्वरं में सम्मिलित होकर प्यार बांटने वाले
सभी समर्थनदाताओं-टिप्पणीकर्ताओं के प्रति
हृदय से आभार ! धन्यवाद ! कृतज्ञता !
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