ब्लॉग मित्र मंडली

8/3/11

मां पत्नी बेटी बहन ; देवियां हैं , चरणों पर शीश धरो !



समस्त् महिला ब्लॉगर्स को ससम्मान समर्पित है
आज की पोस्ट

स्वागत सब ब्लॉगर्स का है

आज प्रस्तुत है एक बहुत जोशीला गीत

कई अवसरों पर इस गीत की सस्वर प्रस्तुति को
 भरपूर शाबासी , उन्मुक्त हृदय से समर्थन ,  
हार्दिक स्नेह और निश्छल आशीर्वाद मिला है 

गला अचानक ख़राब हो जाने के कारण आज बिना गाए ही लगा रहा हूं  
लेकिन पढ़ कर भी आपको आनन्द आएगा …


हम धूल नहीं पैरों की 

हम नवयुग की नारी हैं , आधुनिक युग की नारी हैं !
ऐ पुरुष प्रधान समाज ! समझना मत कॅ हम बेचारी हैं !!

कंधे से कंधा टकरा कर चलती हैं पुरुष के साथ हम !
हर एक चुनौती को ललकार के दे सकती हैं मात हम !

कौनसा है वह क्षेत्र जहां हमने ना पांव बढ़ाए हैं ?
देख हमारी प्रगति दुनिया वाले सब चकराए हैं !!


हैं सैनिक हम , वैज्ञानिक हम ; जज , डॉक्टर हम इंजीनिअर !
हम शासक भी, ट्रकचालक भी , हम अफ़सर , पुलिस , कलक्टर !

चांद भी छू आई हैं ; खेल जगत में करतीं नाम हैं !
हम विश्व को सम्मोहित करतीं ; क्या ख़ूब हमारी शान है ?
घर-बार संभाला है हमने ; परिवार हमीं से फलता है !
व्यापार चलाती हैं हम ही ; संसार हमीं से चलता है !!

सुनलो ऐ पुरुषों ! हम अब तुमसे ना डरने वाली हैं !
हम कई करिश्मे बड़े बड़े , दुनिया में करने वाली हैं !
हमें जिन्होंने सदियों जकड़ा … वे सब बंधन तोड़ेंगीं !
जो राह में बाधाएं आएंगीं , उनका गला मरोड़ेंगीं !!
हम आंधी हैं ! हम बिजली हैं ! तपते सूरज की किरणें हैं !
जो हमको कम आंकेंगे ; भाव उन्हीं के नीचे गिरने हैं !!

 

ऐ हम पर ज़ुल्म की इच्छा रखने वालों ! अब हों सावधान !
बीत गए दिन वे, जब थी नारी बेबस और बेज़ुबान !!
हम अपने हक़ की ख़ातिर लड़ना-मरना सीख चुकी हैं !
किस होश में हो सुनलो ! बीसवीं सदी भी बीत चुकी है !!

औरत को अपनी खेती कहने वालों ! थोड़ी शर्म करो !
मां पत्नी बेटी बहन ; देवियां हैं , चरणों पर शीश धरो !!
अब यह कोई भी ना समझे , कि नारी पुरुष की जूती है
हम धूल नहीं पैरों की ऊंचे चांद-सितारे छूती हैं !!

हक़ हमें हमारे दे दो पुरुषों ! …तो तुमसे कुछ बैर नहीं !
संघर्ष के पथ हम उतर पड़ीं …तो समझो कॅ फिर ख़ैर नहीं !!
जीयो हमें भी जीने दो ! बस इतनी मांग हमारी है !
हम नवयुग की नारी हैं ! आधुनिक युग की नारी हैं !! 
-राजेन्द्र स्वर्णकार
(c)copyright by : Rajendra Swarnkar


हे देवियों ! माताओं ! बहनों ! भाभियों !
गीत में आपकी ही बात कही है मैंने , कुछ तो भेंट उपहार दीजिए 
ज़्यादा नहीं … अपनी प्रतिक्रिया में कुछ आशीर्वाद , कुछ स्नेह , कुछ प्यार दीजिए 


हां 
चारों चित्रों में
शस्वरं की टिप्पणीदाता-समर्थनदाता ब्लॉगरानियों की छवि के दर्शन हैं ।
कुछ एक के चित्र फिर भी नहीं लगाए जा सके … सॉरी !
अगली बार का वादा रहा

…तो पहचानिए किस चित्र में कौन है …

विश्व महिला दिवस
की 
बधाई एवं शुभकामनाएं !