ब्लॉग मित्र मंडली

17/7/12

ख़ून से हैं तर-ब-तर अनेक रोटियां !


यार ! निगलने से पहले देख रोटियां !
ख़ून से हैं तर-ब-तर अनेक रोटियां !

बस्तियां हिंदू-मुसलमां , जिसकी भी जलें
आग कैसी भी कहीं हो ; सेंक रोटियां !

पाप पुण्य में बदलले ! झूठ सच बना !
चमचमाती-खनखनाती फेंक रोटियां !

ख़ासो-आम आसमां उथलने में लगे
ख़ुद सही-ग़लत लिखाए लेख रोटियां !

मर गया जाहिल कोई राजेन्द्र भूख से
पेट में वो डालता था नेक रोटियां !
-राजेन्द्र स्वर्णकार
©copyright by : Rajendra Swarnkar
मेरी यह रचना
मेरे प्रथम हिंदी ग़ज़ल-नज़्म संग्रह “आइनों में देखिए” (2004)में 
सम्मिलित है


फेसबुक  के मित्रों का आभार !
 July 17, 2012

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"शीर्षक अभिव्यक्ति" में उनवान ***रोटी/चपाती/फुलका*** पर मेरी रचना...
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यार ! निगलने से पहले देख रोटियां !
ख़ून से हैं तर-ब-तर अनेक रोटियां !

बस्तियां हिंदू-मुसलमां , जिसकी भी जलें
आग कैसी भी कहीं हो ; सेंक रोटियां !

पाप पुण्य में बदलले ! झूठ सच बना !
चमचमाती-खनखनाती फेंक रोटियां !

ख़ासो-आम आसमां उथलने में लगे
ख़ुद सही-ग़लत लिखाए लेख रोटियां !

मर गया जाहिल कोई ‘राजेन्द्र’ भूख से
पेट में वो डालता था नेक रोटियां !


-राजेन्द्र स्वर्णकार
©copyright by : Rajendra Swarnkar
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गोविन्द हांकलाजी द्वारा सुझाये गए शीर्षक पर मुझे मेरी यह पुरानी रचना याद आ गई,
जो मेरे प्रथम हिंदी ग़ज़ल-नज़्म संग्रह “आइनों में देखिए” (2004) में सम्मिलित है ।
राजेन्द्र स्वर्णकार
बीकानेर - राजस्थान
मोबाइल नं : 09314682626
ईमेल : swarnkarrajendra@gmail.com
visit : http://shabdswarrang.blogspot.com/
visit : http://rajasthaniraj.blogspot.com/
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 ·  ·  · Edit · July 17

    • Kedar Nath Bahut khoob kaha ji

    • Govind Hankla मर गया जाहिल कोई ‘राजेन्द्र’ भूख से
      पेट में वो डालता था नेक रोटियां ! wah wah wah kya shandar gazal badhaai bhaai ji !


    • Nisha Kothari मर गया जाहिल कोई ‘राजेन्द्र’ भूख से
      पेट में वो डालता था नेक रोटियां !.......pura match hi achha khela par last ball me to chhakaa maar diya ji !!!


    • Simi Maini बस्तियां हिंदू-मुसलमां , जिसकी भी जलें
      आग कैसी भी कहीं हो ; सेंक रोटियां,,,,,,,,,,bada kadva sach baya kiya hai aapne is rachna mein,,,,sach hai,,,,aaj vartmaan mein har koi bas roti chahta hai bhale hi vo kisi ki dard ki aaj se sike,,,,,,sochne par majboor karti hai aapki rachna


    • Vishwajeet Sapan मर गया जाहिल कोई ‘राजेन्द्र’ भूख से
      पेट में वो डालता था नेक रोटियां !

      बहुत खूब जनाब, कमाल के भावों को आपने अश'आरों में जिया है .. सादर नमन

      July 17 at 8:54pm ·  · 1

    • Narendra Sharma सच के, बहुत तीखे शब्द-बाण, सार्थक रचना राजेन्द्र जी ,बधाई !
      July 17 at 8:57pm ·  · 1

    • दीप जीरवी rchna achhy hai. Kshma sahit mein isay gazal nhy kahu ga
      July 17 at 8:58pm via mobile · 

    • Harish Bhatt बस्तियां हिंदू-मुसलमां , जिसकी भी जलें
      आग कैसी भी कहीं हो ; सेंक रोटियां ! sundar or shashakt abhivyakti


    • Prahlad Pareek lajawab

    • सुरेन्द्र नवल ‎.
      यार ! निगलने से पहले देख रोटियां !
      ख़ून से हैं तर-ब-तर अनेक रोटियां !......... जो लोग स्वार्थ में अंधे हो कर अपनी रोटियों को खून से तर-ब-तर कर लेते हैं उनको बहुत करारा जवाब आपने इस शे'र में दिया है...

      बस्तियां हिंदू-मुसलमां , जिसकी भी जलें
      आग कैसी भी कहीं हो ; सेंक रोटियां !.......... मौका परस्तों पर बहुत खूबसूरती से तंज किया है आपने इस शे'र में...

      पाप पुण्य में बदलले ! झूठ सच बना !
      चमचमाती-खनखनाती फेंक रोटियां !......... चमक किसी भी चीज की स्वार्थी लोगों को इतना अंधा कर देती है कि वो जीवन मूल्यों तक को छोड़ देता है इस हकीकत को बहुत खूबसूरती से आपने इस शे'र में बयान किया है...

      ख़ासो-आम आसमां उथलने में लगे
      ख़ुद सही-ग़लत लिखाए लेख रोटियां !......... वाह्ह्ह्हह्ह्ह्ह, बहुत उम्दा बहुत ख़ास...

      मर गया जाहिल कोई ‘राजेन्द्र’ भूख से
      पेट में वो डालता था नेक रोटियां !............ बहुत बड़ी बात कह डाली आपने इस शे'र में... आज के ज़माने का यह दस्तूर सा बनता जा रहा है कि जो व्यक्ति नेकी पर चलकर दो जून की रोटी कमाता है वो एक दिन भूख ही से मर जाता है... एक से एक खूबसूरत अहसासों को आपने बहुत खूबसूरत लफ़्ज़ों में सजा कर इस रचना में पेश किया है... आपको इन खूबसूरत अशार के लिए बहुत बहुत बधाईRajendra स्वर्णकार जी भाई साहब... सादर वन्दे...


    • Ajay Kumar aapki in panktiyo ka jawab nhi....umda...

      यार ! निगलने से पहले देख रोटियां !
      ख़ून से हैं तर-ब-तर अनेक रोटियां !
      बस्तियां हिंदू-मुसलमां , जिसकी भी जलें
      आग कैसी भी कहीं हो ; सेंक रोटियां !..

      July 17 at 10:43pm · Edited · 

    • Alka Gupta मार्मिक अंदाज ......वाह
      यार ! निगलने से पहले देख रोटियां !
      ख़ून से हैं तर-ब-तर अनेक रोटियां !


    • Sia Kumar यार ! निगलने से पहले देख रोटियां !
      ख़ून से हैं तर-ब-तर अनेक रोटियां !............ वाह क्या बात कही है जिस इंसान के सीने में दिल धडकता हो उसको छलनी कर दे ऐसे लफ़्ज़ों के जरिये आपने एहसासों को कहा है इस शेर में

      बस्तियां हिंदू-मुसलमां , जिसकी भी जलें
      आग कैसी भी कहीं हो ; सेंक रोटियां !......... कुछ लोग इतने स्वार्थी हो जाते हैं जिनको किसी से कोई मतलब नहीं होता है ऐसे स्वार्थी लोगों पर बहुत खूबसूरती से आपने प्रहार किया है इस शेर में

      मर गया जाहिल कोई ‘राजेन्द्र’ भूख से
      पेट में वो डालता था नेक रोटियां !............ वाह क्या कहने है Rajendra Swarnkar जी बेहद गहरी बात कह डाली आपने इस शेर में...रोटी के लिए इंसान क्या क्या कर गुजरता इन एहसासों को बेहद खूबसूरती से आपने अपनी इस रचना में बेहद खूबसूरत और कसे हुए लफ्ज़ दिए हैं आपको इन खूबसूरत अशार के लिए बहुत बहुत बधाई


    • Diwakar Ayachit बस्तियां हिंदू-मुसलमां , जिसकी भी जलें
      आग कैसी भी कहीं हो ; सेंक रोटियां ! bahut hi marmik bhav rachnaRajendra Swarnkar jee.


    • Ashutosh Chauhan बस्तियां हिंदू-मुसलमां , जिसकी भी जलें
      आग कैसी भी कहीं हो ; सेंक रोटियां ! ,,,,,,,,,wahhhhhhhhhhh,,bahut sundar rachna sir ji,,badhai ho,,


    • Arvind Yogi ख़ासो-आम आसमां उथलने में लगे
      ख़ुद सही-ग़लत लिखाए लेख रोटियां !

      मर गया जाहिल कोई ‘राजेन्द्र’ भूख से
      पेट में वो डालता था नेक रोटियां !
      .......wah adbhud rachna anokhe andaj me ...koti koti naman aapki varad lekhni ko vandemtram


    • Semant Harish सुन्दर....

    • Vishwajeet Sharma waaaahhhh.... bahut sundar....!

    • Jyoti Dang sadhuwaad

    • Dk Nagaich Roshan Shandaaaaaaaaaaaaarrrrrr.... ek se ek umdaa ashaar kahe hain Rajendra Swarnkar sahab.... bahut hi khoobsoorat ghazal kahi hai... bahut mubarakbaad...


36 टिप्‍पणियां:

expression ने कहा…

बहुत सुन्दर राजेंद्र जी...
बड़े दिनों बाद आपकी रचना पढ़ने मिली...
मन को छू गयी..

सादर
अनु

Rajesh Kumari ने कहा…

वाह जबरदस्त कटाक्ष में लिपटी ग़ज़ल मस्तिष्क में हलचल मचादी इस ग़ज़ल ने बधाई प्रिय राजेन्द्र जी

डॉ टी एस दराल ने कहा…

वाह भाई जी ! बहुत दिनों बाद आए पर बहुत बढ़िया ग़ज़ल लेकर आए हैं .

सोना चांदी न धन दौलत अपार
भूख मिटाती हैं बस नेक रोटियां !

सावन की शुभकामनाएं .

Sunil Kumar ने कहा…

बहुत बढ़िया ग़ज़ल शुभकामनाएं .......

udaya veer singh ने कहा…

बहुत सुन्दर राजेंद्र जी...बहुत-2 शुभकामनाएं ..

रंजना [रंजू भाटिया] ने कहा…

waah bahut sundar likha aapne.....ek ek sher khubsurat hai...

संगीता पुरी ने कहा…

वाह बहुत सुंदर ..

एक नजर समग्र गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष पर भी डालें

शालिनी कौशिक ने कहा…

bhavatmak gazal सार्थक व् सुन्दर प्रस्तुति आभार समझें हम

ऋता शेखर मधु ने कहा…

दिल को छूती गज़ल...
अन्तिम शेर मैं सच की उत्कृष्टता लाज़वाब है !!

dheerendra ने कहा…

सुंदर गजल लिए, राजेन्द्र जी,,,बधाई,,,

RECENT POST ...: आई देश में आंधियाँ....

वाणी गीत ने कहा…

आग कैसी भी हो , सेंकने वाले सेक लेते हैं रोटियां !
व्यवस्था पर चोट करती भावपूर्ण रचना !

smt. Ajit Gupta ने कहा…

बढिया है।

निर्मला कपिला ने कहा…

बहुत खूब।

ताऊ रामपुरिया ने कहा…

नेक रोटियों का स्वाद ही आजकल गायब हो गया है, शुभकामनाएं.

रामराम

Saras ने कहा…

बहुत ही सहज भाव से कही ..असहज बातें

Maheshwari kaneri ने कहा…

बहुत दिनों बाद आपकी रचना पढ़ने मिली..बहुत सुन्दर गज़ल..आभार..

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

और यह सब करने के बाद लोगों को सुकून से नींद कैसे आती है..

दिगम्बर नासवा ने कहा…

बहुत ही प्रभावी शेर हैं सभी इस गज़ल के ... मज़ा आ गया राजेन्द्र जी हकीकत से जुड़े इन शेरों को पड़ने के बाद ...

Govind Hankla ने कहा…

मर गया जाहिल कोई ‘राजेन्द्र’ भूख से
पेट में वो डालता था नेक रोटियां !

wah wah wah
kya shandar gazal badhaai bhaai ji !

Sunita Sharma ने कहा…

पाप पुण्य में बदलले ! झूठ सच बना !
चमचमाती-खनखनाती फेंक रोटियां !

ख़ासो-आम आसमां उथलने में लगे
ख़ुद सही-ग़लत लिखाए लेख रोटियां !

nek roti khane wale sach me aaj bhukhe mar rhe hai ji
saty kaha aapne

badhai ho rajendra ji

-Sunita Sharma

Nisha Kothari ने कहा…

.
Nisha Kothari

मर गया जाहिल कोई ‘राजेन्द्र’ भूख से
पेट में वो डालता था नेक रोटियां !

.......pura match hi achha khela
par last ball me to chhakaa maar diya ji !!!

सदा ने कहा…

भावमय करते शब्‍दों के साथ .. मन को छूती प्रस्‍तुति ।

Reena Maurya ने कहा…

बहुत ही बेहतरीन रचना..

ब्लॉ.ललित शर्मा ने कहा…

बेहतरीन रचना

शSSSSSSSSSS
कोई है

अल्पना वर्मा ने कहा…

बहुत तेज़ धार लिए है आज की कविता.हर पंक्ति गहरा कटाक्ष लिए हुए.
यही है वर्तमान का सच...
भूख इंसान को क्या न करा दे और नेकी के रास्ते तकलीफदेह ही होते हैं !

sheetal ने कहा…

sundar

सतीश सक्सेना ने कहा…

कमाल की लेखनी है आपकी राजेंद्र भई !
बधाई !

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

व्यवस्था पर गहरा कटाक्ष ...बहुत बढ़िया गजल

महेश सोनी ने कहा…

Rotiya kya kahu rachnake barte me just simply superb

रचना दीक्षित ने कहा…

बहुत सुन्दर राजेंद्र जी क्या जबरदस्त कटाक्ष किया है. यूँ तो काफी समय के बाद आपको पढ़ने को मिला लेकिन जब मिला तो हर बार की तरह कुछ बहुत उम्दा.

हरकीरत ' हीर' ने कहा…

मर गया जाहिल कोई राजेन्द्र भूख से
पेट में वो डालता था नेक रोटियाँ ..

आठ वर्ष पुरानी '' आइनों में देखती '' ग़ज़ल ...

आज भी उतनी प्रभावशाली ....

( ये रोटियाँ नहीं परांठे हैं वो भी आलू के ...)

boletobindas ने कहा…

अधिकांश जनता भी बेवकूफ है...खून से तर-बतर खुद हम ही करते हैं....खासकर भारत में तो धर्म के नाम पर दंगा करने की रिवायत चल पढ़ी है....इतिहास को दफन करने की बजाए गड़े मुर्दे उखाड़कर हम उसपर ही लड़ते रहते है....जबतक हम सुधरेंगे नहीं..समाज बदलेगा नहीं....तबतक राजनीति से उम्मीद बेकार है..क्योंकि ऐसी राजनीति करने वालों को हम ही अपना नुमाइंदा बनाते हैं....मगर कोई ये नहीं सोचता कि ऐसी नुमाइंदगी हमं आगे ले जाने की बजाय पीछे धकेलती है.....रोटी को खून से तर-बतर कर देती है..जिंदगी को बैरोनक कर देती है..हर सांस पर पहरा लगा देती है...

ana ने कहा…

bahut hi sundar wa yatharth parak rachana

मनोज कुमार ने कहा…

अहा!
लाजवाब!!
जो नेक रोटियां पेट में डालने के इच्छुक होते हैं, सच में वे भूख से बिलबिला कर मर ही जाते हैं।

मनोज कुमार ने कहा…

अहा!
लाजवाब!!
जो नेक रोटियां पेट में डालने के इच्छुक होते हैं, सच में वे भूख से बिलबिला कर मर ही जाते हैं।

Dr (Miss) Sharad Singh ने कहा…

मन को उद्वेलित करने वाली भावपूर्ण रचना....