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12/2/13

प्राण प्रणय के पंथ पर पुलकित करे प्रयाण !

आज प्रस्तुत है

बासंती दोहा-ग़ज़ल
कुसुमाकर ! मदनोत्सव ! मधुबहार ! ऋतुराज !
हे बसंत ! ॠतुपति ! हृदय मन मस्तिष्क विराज !!
ॠतु अधिनायक ! काल के चक्रवर्ती सम्राट !
महादेव मन्मथ मनुज लोक तिहुं तव राज !!
मस्ती हर्ष प्रफुल्लता , धरा गगन पाताल !
रंग भरो रुच’ नित करो महारास रतिराज !!
दुविधा में रसना... कहे कैसे मन की बात ?
नैनों से आधी छिनी... मन से पूरी लाज !!
प्राण प्रणय के पंथ पर पुलकित करे प्रयाण !
मृग खग चातक जीव सब धन्य... रंग रसराज !!
जड़-चेतन में हो रहा , नवजीवन-संचार !
रोम-रोम नस-नस बजे प्रणय-माधुरी-साज !!
हर हरि हिय हुलसायतुम हरलो हर अवसाद !
अनुष्ठान आनन्द को करनो तुम्हरो काज !!
हे बसंत ! रहिए सदा बन जगती के प्राण !
आभारी राजेन्द्र ; की कृपा जगत पर... आज !!
-राजेन्द्र स्वर्णकार
©copyright by : Rajendra Swarnkar
यहां सुन लीजिए यह बासंती रचना मेरे स्वर में

©copyright by : Rajendra Swarnkar




समय मिले तो कुछ और बासंती रंगों में भीगने पहुंचिएगा यहां
प्यारो न्यारो ये बसंत है
स्वागतम बसंत
प्रेम बिना निस्सार है यह सारा संसार

44 टिप्‍पणियां:

Ramakant Singh ने कहा…

अद्भुत मन की गहराई तक उतरनेवाली रचना के लिए आभार .आपकी आवाज़ की कमी खली

yashoda Agrawal ने कहा…

आपकी यह बेहतरीन रचना बुधवार 13/02/2013 को http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जाएगी. कृपया अवलोकन करे एवं आपके सुझावों को अंकित करें, लिंक में आपका स्वागत है . धन्यवाद!

Satish Saxena ने कहा…

श्रेष्ठ वसंत वंदना कर आनंद आ गया कविराज !
मंगल कामनाएं आपके लिए !

ANULATA RAJ NAIR ने कहा…

बहुत बहुत सुन्दर!!!!
सुनकर तो आनंद आ गया....

सादर
अनु

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' ने कहा…

"स्वर्णकार के ब्लॉग पर, पुलकिुत है मधुमास।
प्राण प्णय के पंथ पर, होना नहीं उदास।।"
--
मधुमास का अप्रतिम चित्रण!
--
आपकी पोस्ट का लिंक आज के चर्चा मंच पर भी है!

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

आगत बसन्त,
स्वागत बसन्त..

रविकर ने कहा…

चमत्कारिक अलंकारिक ।

शब्दों का दुर्लभ प्रयोग -

शुभकामनायें ।।

रविकर ने कहा…

ऋतु अधिनायक काल के, -------

Meenakshi Malhotra ने कहा…

बेहद ख़ूबसूरत,
जैसे बसंत अपने सारे मादक रंग समेटे सामने आ खड़ा हुआ हो।

आपकी आवाज़ में और भी निखर आया।
Meenakshi Malhotra

Dr.NISHA MAHARANA ने कहा…

waah bahut badhiya.....

Sadhana Vaid ने कहा…

शब्द, छंद, भाव में तो अद्भुत अप्रतिम है ही यह रचना, आपके मधुर गायन ने और सोने पर सुहागे का काम किया है ! आज की सुबह बहुत आनंदमयी कर दी आपने राजेन्द्र जी ! वसंत की आपको भी ढेर सारी शुभकामनाएं और बधाई !

ओंकारनाथ मिश्र ने कहा…

बहुत खूबसूरती से लिखा और गाया है आपने राजेंद्र. आपकी रचनाएँ बहुत अच्छी लगती है.

सदा ने कहा…

वाह ... बहुत ही भावमय करते शब्‍द ...

vandan gupta ने कहा…

बहु्त खूबसूरत वासंतिक रचना

Anita ने कहा…

सदा की तरह रंग भरी कविता..

दिगम्बर नासवा ने कहा…

अनुपम प्राकृति को साकार करती ... दृदय को स्पंदित करती ... बासंती रंगों में रंगी लाजवाब अतुल्नीय कृति ...
बहुत बधाई इस रचना के लिए ...

Shalini kaushik ने कहा…

बहुत सुन्दर व् सराहनीय अभिव्यक्ति अफज़ल गुरु आतंकवादी था कश्मीरी या कोई और नहीं ..... आप भी जाने संवैधानिक मर्यादाओं का पालन करें कैग

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

ऋतुराज पर बहुत सुंदर रचना .... आभार

कालीपद "प्रसाद" ने कहा…

Anupam vaasanti gaan. par mere laptop ki kharabi ke karan aapke awaj se vanchit raha gaya.

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया ने कहा…

बसंत ऋतू का अद्भुत चित्रण,बधाई राजेन्द्र जी,

RECENT POST... नवगीत,

shalini rastogi ने कहा…

अद्भुत, अद्भुत, अति अद्भुत ..इससे बेहतर कुछ और क्या कहें इस सुन्दर रचना कि प्रशंसा में

Unknown ने कहा…

बहुत बहुत सुन्दर.....आनंद आ गया..

मोहन थानवी ने कहा…

बहुत ही आनंद दायक । बधाई । ***
ॠतु अधिनायक ! काल के चक्रवर्ती सम्राट !
महादेव मन्मथ मनुज लोक तिहुं तव राज !!

मोहन थानवी ने कहा…

बहुत ही आनंद दायक । बधाई । ***
ॠतु अधिनायक ! काल के चक्रवर्ती सम्राट !
महादेव मन्मथ मनुज लोक तिहुं तव राज !!

डॉ टी एस दराल ने कहा…

वाह भाई वाह !
स्वर्ण जडित बसंती रंगों का आनंद आ गया रचना पढ़कर।
बेहतरीन।

Unknown ने कहा…

आपके इस पोस्ट की चर्चा बुधवार के चर्चा मंच पर भी है | जरूर पधारें |
सूचनार्थ |

ऋता शेखर 'मधु' ने कहा…

सुंदर शब्दों से सजी ऋतुराज का स्वागत-गीत
शानदार रचना !!

प्रतिभा सक्सेना ने कहा…

रुपहले स्वरों में सजा मधुर वासंती गीत - बधाई!

shashi purwar ने कहा…

namaste rajendra ji
behad umda srajan ,baasanti aagaj , premmayi madhumaas ..... hraday se badhai aapko

Madan Mohan Saxena ने कहा…

सुन्दर प्रभाब शाली अभिब्यक्ति .आभार .

Shashi ने कहा…

so beautiful .

***Punam*** ने कहा…

जड़-चेतन में हो रहा,नवजीवन-संचार
रोम-रोम नस-नस बजे प्रणय-माधुरी साज !!

हे बसंत ! रहिये सदा बन जगती के प्राण !
प्राण प्रणय के पंथ पर पुलकित करे प्रयाण !!
(क्षमा चाहूंगी आखिरी पंक्ति को बदलने के लिए)

बसंत की मादकता से मदमाती आपकी रचना के लिए बधाई....!
आपके शब्द-विन्यास और भाव-अभिव्यक्ति की प्रशंसा के लिए शब्द नहीं हैं मेरे पास...!!
सुन्दरतम रचना.....!!

Rohit Singh ने कहा…

अब बसंत की बयार है तो जाहिर है आपसे कुछ सुनने को मन था ही.....खूबसूरत हिंदी में इतने प्यार से गाया है तो जाहिर है कि बंसत अपना तो बन ही जाएगा..हमारी बंसत और वैलेंटाइन की मोहब्बत से कल दो चार होईएगा इसी वक्त

हरकीरत ' हीर' ने कहा…

अभी तो मधुर आवाज़ के नशे में डूबी हूँ ....एक बार और सुन लूँ तो आती हूँ .....

हरकीरत ' हीर' ने कहा…

इतने कठिन शब्दों को कितनी आसानी से गा लेते हैं आप .....

मैं चाह कर भी स्पष्ट नहीं बोल पाई संग ....

सचमुच माँ सरस्वती की विशेष कृपा है आप पर ....


नमन आपको ....!!

Alpana Verma ने कहा…

अहा! बहुत ही सुन्दर वाचन!
कविता तो अच्छी है ही.
मन बासंती हो गया.आभार.

Rajendra Swarnkar : राजेन्द्र स्वर्णकार ने कहा…



आप सभी के प्रति हृदय से आभारी हूं !
आप सब को
♥✿♥❀♥❁•*¨✿❀❁•*¨✫♥❀♥✫¨*•❁❀✿¨*•❁♥❀♥✿♥
♥बसंत-पंचमी की हार्दिक बधाइयां एवं शुभकामनाएं !♥
♥✿♥❀♥❁•*¨✿❀❁•*¨✫♥❀♥✫¨*•❁❀✿¨*•❁♥❀♥✿♥


Anupama Tripathi ने कहा…

बहुत सुंदर स्वागत बसंत का ....
अत्यंत भावप्रबल ....

Saras ने कहा…

वाह ...अद्भुत...!!!

girish pankaj ने कहा…

वाह, ऐसा लग रहा है मै साहित्य के सुनहरे मध्य युग में पहुँच गया हूँ। अद्भुत शिल्प।क्या बात है। शब्द और स्वर भी कमाल कर रहे हैं। हार्दिक शुभकामनाये इस सृजन के लिए .

Rajput ने कहा…

आपकी आवाज ने तो और चार चाँद लगा दिये :), लाजवाब

इस्मत ज़ैदी ने कहा…

जड़-चेतन में हो रहा,नवजीवन-संचार
सच है राजेंद्र जी आप की रचनाएं नव जीवन का संचार तो अवश्य करती हैं
यदि ज़ुबान का लुत्फ़ उठाना हो आप के ब्लॉग का रुख़ कर लेना चाहिये
बहुत बहुत सुंदर ,,मज़ा आ गया

प्रसन्नवदन चतुर्वेदी 'अनघ' ने कहा…

लाजवाब रचना...बहुत बहुत बधाई...

शिवनाथ कुमार ने कहा…


ऋतु राज का सुन्दर स्वागत ....
सादर !