नवल सूर्य नव वर्ष का, दे स्नेहिल संस्पर्श!
पल-प्रतिपल हो हर्षमय, पथ-पथ पर उत्कर्ष!!
पल-प्रतिपल हो हर्षमय, पथ-पथ पर उत्कर्ष!!
प्रस्तुत है एक गीत
भोर सुहानी
यह भोर सुहानी भोर हो !
प्राची में केशर ढुलके,
पूरे भूमंडल पर छा जाए !
आलोकित नव दिनकर
जगती का तिमिर-तुमुल झुलसा जाए !
आकंठ आनंदित दसों दिशाएं,
सुख समृद्धि चहुं ओर हो !
यह भोर सुहानी भोर हो !!
संदेश सहस्रों आशाओं के
आगत क्षण-क्षण ले आएं !
अवसाद मिटें, भ्रम-जाल कटें,
मिल जाएं बिछोही ; मुसकाएं !
विश्वास-वृष्टि में आर्द्र-सजल,
आह्लादित हर दृग-कोर हो !
आह्लादित हर दृग-कोर हो !
यह भोर सुहानी भोर हो !!
अवनी के कण-कण , जल में ,
पवन में अमृत-जीवन सरसाए !
निज कर्म-लीन तल्लीन हो'
हर प्राणी झूमे-नाचे-गाए !
ना कोई व्यथित, मन-मन प्रमुदित हो,
निकट-निकट हर छोर हो !
यह भोर सुहानी भोर हो !!
- राजेन्द्र स्वर्णकार
(c)copyright by : Rajendra Swarnkar
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यह गीत यहां सुनें मेरे स्वर में
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