ब्लॉग मित्र मंडली

18/8/11

मेरी ग़लती का नतीज़ा ; ये मेरी सरकार है


जबरन् बन गया मालिक ; जो चौकीदार है
काग़जी था शेर कल , अब भेड़िया ख़ूंख़्वार है
मेरी ग़लती का नतीज़ा ; ये मेरी सरकार है
सर से पा एहसांफ़रामोशी भरी है जिस्म में
 और हर इक रग़ भी इसकी शातिरो-मक्कार है
वोट से मेरे ही पुश्तें इसकी पलती हैं मगर
मुझपे ही गुर्राए ... हद दर्ज़े का ये गद्दार है
मेरी ख़िदमत के लिए मैंने बनाया ख़ुद इसे
घर का जबरन् बन गया मालिक ; जो चौकीदार है
छीनता मेरे निवाले , चूसता मेरा लहू 
कहता है अब जां मेरी लेने का यह हक़दार है
इसके दामन में मुझे देने की ख़ातिर है दग़ा
पास मेरे भी इसे देने को बस धिक्कार है
भ्रष्ट भी , निकृष्ट भी , हिटलर भी , तानाशाह भी
रूह कालिख में रंगी , इसका यही सिंगार है 
लपलपाती जीभ से तकता है मुझको आजकल
भेड़ियों-गिद्धों का आदम रूप में अवतार है
निभ सकी इससे न अब तक अपनी ज़िम्मेदारियां
चंद दिन में रुख़्सती का दिख रहा आसार है
सब तेरी मनमानियां सहलीं मगर सुन ! आज से
फ़ैसला करने को जनता हिंद की तैयार है
पूजना शैतान को राजेन्द्र मज़बूरी नहीं
वोट ज्यूं ही इस क़लम का भी अहम क़िरदार है
राजेन्द्र स्वर्णकार 
©copyright by : Rajendra Swarnkar


मित्रों ! हाथ में क़लम थाम रखी है तो निस्संदेह 
आपका दायित्व वर्तमान परिस्थितियों में और भी बढ़ा है । 
दलगत आस्था से हर हाल में ऊपर उठ कर ही 
ईमानदारी से न्याय की स्थापना के लिए
सोचने और निर्णय लेने का समय है ।



सबको सन्मति दे भगवान !

98 टिप्‍पणियां:

Kailash C Sharma ने कहा…

बहुत सटीक चोट इस तानाशाह सरकार पर, जो अपने आप को जनता से ऊपर समझने लगी है. आज सभी को एकजुट होकर अन्ना का साथ देना होगा. आभार

shashi purwar ने कहा…

bahut - bahut badhai . bilkul sach kaha aapne ....... meri galti ka natija .

Anita ने कहा…

बहुत जोश भरे शब्दों में आज के हालात पर कटाक्ष करती रचना.. जनता अब जाग चुकी है...

इस्मत ज़ैदी ने कहा…

"ab har ik satta samajh le jaan le zinda hain ham"

bahut umda aur samayaanukool hai ap ki ye rachna lekin us samay tak kuchh naheen badal sakta jab tak ham khud ko n sudhaaren
keval sarkar ko dosh kyon den jab matdan ke din vote dene na jaa kar picnic manaaen?

इस्मत ज़ैदी ने कहा…

bahut umda aur samayanukool hai ap ki rachna

kisi bhi samajik dhaanche men aamool chool parivartan ke liye hamen apne desh ke prati eemandaar aur zimmedar banna padega

Dr (Miss) Sharad Singh ने कहा…

वर्तमान का खाका खींच दिया है आपने अपनी कविता में. बहुत बढ़िया...शानदार अभिव्यक्ति.

S.M.HABIB ने कहा…

अत्यंत सार्थक रचना राजेन्द्र भईया....
सादर बधाई...

ताऊ रामपुरिया ने कहा…

सम सामयिक हालात पर एक अति सटीक रचना, बहुत शुभकामनाएं.

रामराम.

: केवल राम : ने कहा…

यह मेरी सरकार है
तभी तो हाहाकर है ...!

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

टिप्पणी में केवल इतना ही कहूँगा-
अपना भारतवर्ष है, गाँधी जी का देश।
सत्य-अहिंसा का यहाँ, बना रहे परिवेश।१।

शासन में जब बढ़ गया, ज्यादा भ्रष्टाचार।
तब अन्ना ने ले लिया, गाँधी का अवतार।२।

गांधी टोपी देखकर, सहम गये सरदार।
अन्ना के आगे झुकी, अभिमानी सरकार।३।

साम-दाम औ’ दण्ड की, हुई करारी हार।
सत्याग्रह के सामने, डाल दिये हथियार।४।

जनबल आये हाथ में, ऐसा करो उपाय।
सिंहासन पर प्रजा ही, राजा को बैठाय।५।
--

आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा कल शुक्रवार के चर्चा मंच पर भी की गई है!
यदि किसी रचनाधर्मी की पोस्ट या उसके लिंक की चर्चा कहीं पर की जा रही होती है, तो उस पत्रिका के व्यवस्थापक का यह कर्तव्य होता है कि वो उसको इस बारे में सूचित कर दे। आपको यह सूचना केवल इसी उद्देश्य से दी जा रही है! अधिक से अधिक लोग आपके ब्लॉग पर पहुँचेंगे तो चर्चा मंच का भी प्रयास सफल होगा।

Dorothy ने कहा…

सोचने को विवश करती बेहद सटीक और सार्थक अभिव्यक्ति. आभार.
सादर,
डोरोथी.

प्रतुल वशिष्ठ ने कहा…

जनआक्रोश को बहुत ही सुन्दर शब्दावली से सजाया है. एक-एक शब्द में बेहद तपिश है ...

vidhya ने कहा…

bahut - bahut badhai . bilkul sach kaha aapne ....... meri galti ka natija .

सुशील बाकलीवाल ने कहा…

वर्तमान स्थितियों का सटीक विश्लेषण । आभार सहित...

राज भाटिय़ा ने कहा…

सत्य लिखा आप ने, बहुत सटीक, लेकिन जनता ने सोचा था यह हमे सुख देगे, लेकिन सच मे इन्होने दुख दिया, इस लिये अब नकेल इन की कसनी चाहिये ओर यह मोका हे, धन्यवाद

Er. Diwas Dinesh Gaur ने कहा…

आदरणीय स्वर्णकार जी, आपने भ्रष्टाचारी व तानाशाही सरकार पर सटीक चोट की है| आपने जन आक्रोश को बहुत ही सुन्दर शब्दों में पिरोया है| अफ़सोस है की ऐसे भ्रष्टों को हमने चुना...

चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ ने कहा…

बहुत सुन्दर...

इसे भी देखें-
एक 'ग़ाफ़िल' से मुलाक़ात याँ पे हो के न हो

boletobindas ने कहा…

क्या बात है....सही है गलती हमारी है....जानकर भी गलती करते रहेंगे....वोट डालने के वक्त फिर से भूल जाएंगे....छोटी छोटी घूस देने से बाज आएंगे नहीं....फिर कोसेंगे की कैसी सरकार है..हर बार अन्ना का समर्थन करने आएंगे लेकिन निजी जीवन में सुधरेंगे नहीं....

Rajeev Bharol ने कहा…

बहुत ही सार्थक एवं समयानुकूल गज़ल. बहुत ही उम्दा..

JHAROKHA ने कहा…

bhai ji
kya likhun---itni jabardast vyng koi aap jaisa hi gyani likh sakta hai .rachna ke madhyam se bahut hi karari chit ki hai aapne .aaj ke haqikat se rubru karati aapki post bahut bahut hi achhi lagi
bahut bahut badhi
v naman kr saath
ponam

JHAROKHA ने कहा…

bhai ji
kya likhun ---
aapne to aaj ki sachchai par itni gahri chot ki hai hai ki vo aap jaise virle hi kar sakte hai .
bahut hi prasangik aur samyik post
bahut bahut badhai
v naman
poonam

minoo bhagia ने कहा…

sach hai rajendra ji , choosta mera lahoo , cheenta mere niwale ,
Ab jaan lene ka haqdaar hai ,
achha sher hai

Indranil Bhattacharjee ........."सैल" ने कहा…

गुरुवर राजेंद्र जी,
आप हमारे ब्लॉग पे आये, टिपण्णी किये इसके लिए धन्यवाद ... मेरा स्वर गाने लायक होता तो ज़रूर ग़ज़ल गाकर सुनाता ... फ़िलहाल इस लायक तो बन जाऊं कि कुछ अच्छा लिख पाऊं ...

आप अपने इस रचना में अपने विचार जिस तरह से प्रकट किया है वो कबीले तारीफ़ है ... आपका ही नहीं करोड़ों भारतीयों का यही विचार है ... आपने अपने साथ करोड़ों का हाले दिल बयां किया है ... बधाई !

मेरे ब्लॉग पे आते रहिएगा ! आपका स्वागत है !

ajit gupta ने कहा…

आपने इस निकम्‍मी और भक्षक सरकार को धिक्‍कारने में कोई कसर नहीं छोड़ी लेकिन मन है कि मानता ही नहीं। लगता है कि अभी भी कुछ कमी रह गयी है। कपिल सिब्‍बल, निरूपम जैसे व्‍यक्ति कहते हैं कि सभी सांसदों में एकजुट होकर जनता को बताना चाहिए कि संसद उनसे बड़ी है, ऐसा तो कभी भी किसी राजशाही ने भी नहीं बोला होगा। पता नहीं कैसे लोग कांग्रेस जैसे तानाशाहों को अपना नेता चुन लेते हैं?

रविकर ने कहा…

दलगत राजनीति से ऊपर उठना ही होगा ||
एक स्वर में --
अन्ना आगे बढ़ो
हम तुम्हारे साथ हैं ||

Dr Varsha Singh ने कहा…

सार्थक प्रस्तुति .....

सुरेन्द्र सिंह " झंझट " ने कहा…

bahut sashakt aur saarthak prastuti rajendra ji !


आप सभी को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ ..

आइये हम सब भ्रष्टाचार मुक्त भारत निर्माण के लिए-- सम्माननीय अन्ना हजारे जी के नेतृत्व में-- जन लोकपाल बिल बनाने के लिए--संवेदनहीन एवं तानाशाह सरकार के विरुद्ध जारी देशव्यापी जन आन्दोलन को अपना पूर्ण समर्थन देकर इसे सफल बनाएँ.....

Rakesh Kumar ने कहा…

अति सुन्दर और सटीक शब्दों में आपने यथार्थ को उजागर किया है.सरकार तो हम सभी के सिरों पर अपनी कार रख चला रही है.

सुन्दर प्रस्तुति के लिए बहुत बहुत आभार.

प्रतीक माहेश्वरी ने कहा…

हाँ जी.. गलती हो गयी थी.. अब सब सुधार रहे हैं.. गलतियां हो जाती हैं सभी से.. एक मौका मिला है सुधारने को..

निवेदिता ने कहा…

बहुत सटीक चोट .......
सुन्दर प्रस्तुति........

शाहिद मिर्ज़ा ''शाहिद'' ने कहा…

स्वर्णकार जी, क्या हो रहा है, कुच समझ नहीं आ रहा है.

संजय भास्कर ने कहा…

सही है गलती हमारी है...स्वर्णकार जी

डॉ टी एस दराल ने कहा…

बहुत खरी खोटी सुना दी । चलिए मन की भड़ास तो निकली ।
शायद ऐसा करके ही मन थोडा हल्का तो रहेगा ।
बाकि तो समय ही बताएगा ।

सुमन'मीत' ने कहा…

ek dam steek rachna...

***Punam*** ने कहा…

सारे भारतीय ही सहमत होंगे आपकी बात से..
कोई अतिश्योक्ति नहीं....सीधे-साधे शब्दों में एकदम सच्ची बात कही आपने...आपके लेखन को बधाई

आशा ने कहा…

बहुत सही बयान करती रचना |
बहुत बहुत बधाई |
आशा

kanu..... ने कहा…

bahut hi acchi panktiyan likhi hai aapne rajendra ji .sach hai humne ungli di inne haath pakad liya ,humne thodi chut di to gala pakadne par utaaru ho gae hain.....
bahut bahut shanyawad aapka aapne mere blog ko visit kiya aur link chora.
aap bhi padhe

pradhanmantri nirdosh hai(vyangatmak kaviya)
http://meriparwaz.blogspot.com/2011/08/blog-post_17.html

mridula pradhan ने कहा…

wah......ekdam gazab ka toofan hai apki kavita men.......

Bhushan ने कहा…

प्रिय राजेंद्र जी, नमस्कार
देश की जनता के दिल में ऐसी ही कसक देखी जा रही है. अब महसूस होता है कि मजबूरी के दिन पतले हो जाएँगे.
आपका
भारत भूषण

Suresh kumar ने कहा…

बहुत ही सुंदर रचना आज के हालात पर कटाक्ष करती हुई

हरकीरत ' हीर' ने कहा…

शब्दों से बखूबी मार लेते हैं आप .....

mahendra verma ने कहा…

सब तेरी मनमानियां सहलीं मगर सुन आज से,
फ़ैसला करने को जनता हिंद की तैयार है।

जोश और उत्साह जगाती प्रेरक रचना।

Rahul Paliwal ने कहा…

रिजेक्ट करने का अधिकार भी मिल जाये तो हम कुछ बेहतर लोगो को भेज पाएंगे. और आपको हमको भी आगे आना होगा, सिर्फ वोट के लिए नहीं, बल्कि चुनाव लड़ने के लिए भी.

सतीश सक्सेना ने कहा…

बधाई एक और खूबसूरत रचना पर ...
शुभकामनायें आपको !

Udan Tashtari ने कहा…

बहुत सटीक....सबको सन्मति दे भगवान!!!

विरेन्द्र सिंह चौहान ने कहा…

क्या ग़ज़ब का लिखा है!पढ़कर दिल खुश हो गया !
आप को श्री कृष्णजन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएँ!

Sawai Singh Rajpurohit ने कहा…

आपको एवं आपके परिवार "सुगना फाऊंडेशन मेघलासिया"की तरफ से भारत के सबसे बड़े गौरक्षक भगवान श्री कृष्ण के जनमाष्टमी के पावन अवसर पर बहुत बहुत बधाई स्वीकार करें लेकिन इसके साथ ही आज प्रण करें कि गौ माता की रक्षा करेएंगे और गौ माता की ह्त्या का विरोध करेएंगे!

मेरा उदेसीय सिर्फ इतना है की

गौ माता की ह्त्या बंद हो और कुछ नहीं !

आपके सहयोग एवं स्नेह का सदैव आभरी हूँ

आपका सवाई सिंह राजपुरोहित

सबकी मनोकामना पूर्ण हो .. जन्माष्टमी की आपको भी बहुत बहुत शुभकामनायें

Shambhu Choudhary ने कहा…

सटीक चोट

Maheshwari kaneri ने कहा…

इस तानाशाही सरकार पर ये करारी चोट है.बहुत सटीक और सार्थक रचना धन्यवाद..आप को श्री कृष्णजन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएँ...

सतीश सक्सेना ने कहा…

बड़े प्यारे इंसान हो यार !
खैर ....
जन्माष्टमी की शुभकामनायें स्वीकार करें !

Rajendra Swarnkar : राजेन्द्र स्वर्णकार ने कहा…

# सतीश सक्सेना जी

दिल ने दिल से बात की , बिन चिट्ठी बिन तार … … …


:)

RameshGhildiyal"Dhad" ने कहा…

Aapka ana mere blog par..mujhe utsahit kar gaya..tippani ke liye dhanyawaad...
aapto sach me bada jabardast likhte hain mitra...ek aur sashakt aur saamayik sundar rachna k liye badhaaiyaan....

Minakshi Pant ने कहा…

सार्थक रचना आपकी रचना का जवाब नहीं दोस्त जी |
जय हिंद |

जयकृष्ण राय तुषार ने कहा…

भाई राजेन्द्र जी सबसे पहले आपको गज़ल के लिए धन्यवाद |मेरी गज़ल की त्रुटियों की और ध्यान दिलाने के लिए आभार

जयकृष्ण राय तुषार ने कहा…

भाई राजेन्द्र जी सबसे पहले आपको गज़ल के लिए धन्यवाद |मेरी गज़ल की त्रुटियों की और ध्यान दिलाने के लिए आभार

प्रतिभा सक्सेना ने कहा…

सुविचारित- सार्थक रचना ,
अब तो सन्मति दे भगवान !

Lalit Karma ने कहा…

aadam rup me bhediya-giddho ka avatar hai..bahut badiya..ek ek baat satik aur man ki baat hai.. bahut badiya

कुश्वंश ने कहा…

सबको सन्मति दे भगवान

जय हिंद

कुश्वंश ने कहा…

सबको सन्मति दे भगवान

जय हिंद

शिखा कौशिक ने कहा…

sateek v sarthak abhivyakti .aabhar


SATYMEV JAYTE

रचना दीक्षित ने कहा…

मुझे तो लगता है कि सरकार को हमारे नेताओं को सन्मति दे भगवान. बहुत सामायिक रचना.

Suresh Kumar ने कहा…

दिल को छू गयी आपकी यह रचना...बहुत ही सुन्दर व संवेदनशील..

नारी शक्ति - शाश्वत शक्ति ने कहा…

waah.......sateek aur dhaardaar

anita agarwal ने कहा…

ek behad sashakt rachna... aaj ki dalgat rajineeti per prahaar... dosh ku de doosron ko jab hum khud hi chun ker nakara or bhrashth logo ko kursee per aseen kerte hain....pr samay a gaya hai, agar ab bhi na jage to phir kab?

Amrita Tanmay ने कहा…

बहुत ही सुंदर रचना

रेखा ने कहा…

बहुत सटीक और सार्थक सन्देश देती हुई रचना .....काश अभी चुनाव आने ही वाला होता ...

संध्या शर्मा ने कहा…

सही बात है....ये सब हमारी ही गलती का नतीजा है और इसे ख़त्म करना भी हमारी ही जिम्मेदारी है....कब तक गलती करते रहेंगे.. सन्देश देती सार्थक रचना...

Mansoor Ali ने कहा…

कागज़ी था शेर कल,अब भेड़िया खूंख्वार है,
मेरी ग़लती का नतीजा; ये मेरी सरकार है.

शशक्त अभिव्यक्ति है, इस निराशा जनक माहौल में. आम लोगो के दिल की बात कह रही है आपकी पूरी रचना. इसे पूरी शिद्दत से मैने भी महसूस किया. हम जिस अव्यवस्था के शिकार है , बहुत हद तक उसके ज़िम्मेदार हम भी है, ग़लत नुमाइंदे चुनने से लेकर हर ग़लत बात और नाइंसाफी को चला लेने का गुनाह करके. नगर पालिका, कलेक्टोरेट , राजकीय और केन्द्रीय दफ्तर और अदालत तक भी जिस गहराई से यह भ्रष्टाचार व्याप्त है उसे अकेले कोई हुकूमत नहीं नियंत्रित कर सकती , विशेषकर जबकि प्रदेशो और केंद्र की सरकारे भी उसमे लिप्त हो. हमें हर स्तर पर एक 'अन्ना' की आवश्यकता है, निर्भय अभिव्यक्ति करने वाले 'राजेन्द्र स्वर्णकार' की भी.आपकी क़लम यूँही सच्चाई की आवाज़ बुलंद करती रहे...... शुभ कामनाओं सहित,

मंसूर अली हाश्मी.

यादें ने कहा…

राजिंदर जी .
मैं हरकीरत"हीर" जी के साथ हूँ ..
शब्दों से बखूबी मार लेते हैं आप .....
खुश और स्वस्थ रहें !

सहज साहित्य ने कहा…

भाई स्वर्णकार जी ! आपने सही कहा -'मेरी गलती का नतीज़ा , यह मेरी सरकार है '
द असल आज़ादी मिलने पर सबसे बड़ी गकती हुई -अंग्रेज़ों की भ्रष्ट हृदयहीन मशीनरी को ज्यों का त्योन स्वीकार कर लेना ।दफ़्तरों की लूट -खसोट नहीं बदली । भ्रष्टाचार के हुर बताने वाले अधिकारी और मातहत वे ही थे जो अंगेजों के चापलूस थे । इन्हें न गरीब जनता से पहले मतलब था और न बाद में । इसी बची-खुछ ब्यूरोक्रेसी ने हमारे नेताओं को भी वही आत्मज्ञान दे दिया । नतीज़ा सामने है । जो नेता बटुए में पैसे रखता था , वह अल्मारियों में ठूँसने लगा । जो पूँजीपति 2-4 प्रतिशत लाभ कमाता था, अब गरीब की रोटी छीनकर सैंकड़ों गुना कमाने लगा । हमारे नेता इसी को तरक्की कह रहे हैं । आँकड़े यही बताते हैं, जो न पकाए जाते हैं , न खाए जाते हैं , न बिछाए जाते हैं ।
प्रभावशाली रचना के लिए मेरी हार्दिक बधाई !!

girish pankaj ने कहा…

हमेशा की तरह आपका यह गीत भी अपने समय के यथार्थको दिखाने वाला है. दरअसल हर सच्चा रचनाकार अपने समय के सच को इसी तरह ईमानदारीपूर्वक पेश करता है.

कौशलेन्द्र ने कहा…

"चंद दिन में दिख रहा रुख्सती का आसार है"
राजेन्द्र भाई ! इस भविष्यवाणी के लिए आपके मुंह में घी-शक्कर......और दाल-बाटी-चूरमा भी ....और बाद में वाडीलाल की आइसक्रीम भी.
बेचैनी हो रही है ज़ल्दी रुख्सती करवाइए.

आशा जोगळेकर ने कहा…

मन तो करता है अ‍भी तुरत गद्दि से उतारे. आपकी
कविता ने सारे भारतियो के मन की बात कह दी .
बेहद समयिक और सही रचना.

Suman ने कहा…

nice

जयकृष्ण राय तुषार ने कहा…

भाई राजेंद्र जी व्यवस्था की पीठ पर हंटर मारती आपकी गज़ल बहुत ही अच्छी लगी बधाई और शुभकामनाएं |

जयकृष्ण राय तुषार ने कहा…

भाई राजेंद्र जी व्यवस्था की पीठ पर हंटर मारती आपकी गज़ल बहुत ही अच्छी लगी बधाई और शुभकामनाएं |

Suman ने कहा…

राजेन्द्र जी,
हमेशा की तरह रचना बढ़िया है !
आपका कभी कभार भी ब्लॉग पर
आना अच्छा लगता है आभार
स्नेह के लिये !

Ojaswi Kaushal ने कहा…

Hi I really liked your blog.

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Navin C. Chaturvedi ने कहा…

राजेन्द्र जी आप की कलम ने आम आदमी के आक्रोश को सहज ही व्यक्त कर दिया है।

सच ही कहा है कि ऐसा कृतघ्न सत्ता तंत्र हमारी ही ग़लती का नतीजा है।

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

निष्कर्ष सुखद होंगे।

Jugalkishore Somani ने कहा…

भाई राजेंद्रजी ,
बड़े ही सटीक शब्दों को पिरो कर आपने जो "कांटो" की माला बनाई है , निश्चय ही माला के ये कांटे जहरीले शरीर में चुभ चुभ कर विष को विषयांतर करने में सक्षम है.
देखिये , सीधी सी बात है - दूध पिलाते समय एक क्षण भी माँ अपने बच्चे को छोड़ कर कहीं नहीं जाती है , परन्तु हमने भूल की है , दूध की बोतल तो बच्चे को ही पकड़ाई थी , और लग गए ' अपने ' को संवारने ! दूध कौन पी गया , जानने की चेष्टा ही नहीं की , और अब जब बच्चा रोते रोते बेहाल हो गया तब हमारी आँख खुली , गलती हमारी - खामियाजा भी हमारा !! वोट देने के लिए वोट दे दिया , बस ! हो गयी इति !! " संभल कर रहना होगा हमको , छुपे हुए गद्दारों से " १०० % मतदान और वो भी बुद्धि का सकारात्मक सहारा लेकर - तभी होगा कल्याण . इस सरकार ने तो लालू को भी भला कहला दिया !!!!!
पुनः आपको बधाई , हमारी सरकार के लिए कांटो की माला बनाने पर ......
जुगल किशोर सोमाणी , जयपुर

Jugalkishore Somani jugalkishoresomani@yahoo.co.in

KAHI UNKAHI ने कहा…

बहुत सटीक रचना है...मेरी बधाई स्वीकारें...।

प्रियंका

Vaanbhatt ने कहा…

राजेंद्र जी, बहुत ही ओजपूर्ण है आपकी शैली...हमारे माननीयों को आज पहला सबक मिल गया...संसद में जब जनता की बात नहीं रक्खी जाएगी तो संसद को चुनौती मिलेगी...आज अन्ना का अनशन ख़त्म हुआ...सभी को हार्दिक बधाइयाँ...

मनोज कुमार ने कहा…

ऐतिहासिक क्षण का गवाह बन कर आया हूं। संसद में आज नेताओं ने कहा ... पब्लिक आवर मास्टर।

सुमन'मीत' ने कहा…

bahut hi steek prastuti....jai hind

Rajesh Kumari ने कहा…

bahut uttam sahi likha hai ab hume hi apni galti ko sudharna hoga.soch samajh kar achchi saaf sarkar banani hogi.very nice thoughts.

वन्दना ने कहा…

शब्दो का करारा प्रहार्।

Sadhana Vaid ने कहा…

आज की घिनौनी राजनीति का चेहरा बड़ी खूबी के साथ बेनकाब किया है राजेन्द्र जी ! बहुत ही बेहतरीन रचना है ! बधाई स्वीकार करें !

Apanatva ने कहा…

sashakt lekhan.
Aabhar

somali ने कहा…

अत्यंत सार्थक रचना

Vaneet Nagpal ने कहा…

राजेन्द्र जी ,
नमस्कार,
आपके ब्लॉग को "सिटी जलालाबाद डाट ब्लॉगसपाट डाट काम" के "हिंदी ब्लॉग लिस्ट पेज" पर लिंक किया जा रहा है|

ईं.प्रदीप कुमार साहनी ने कहा…

वर्तमान सरकार और उसकी नीतियों पर चोट करती बहुत शानदार रचना |
मेरे ब्लॉग में आते रहे |

मेरी कविता

बेनामी ने कहा…

I couldn't agree with you more..

Rajendra Swarnkar : राजेन्द्र स्वर्णकार ने कहा…

आदरणीया मौसी जी

मैं मानता हूं ,कोई किसी से हर बात पर हमेशा सहमत नहीं रह सकता ।

बेनामी के रूप में की गई आपकी टिप्पणी के लिए आभारी हूं ! आप अधिकारपूर्वक अपने नाम से भी टिप्पणी करती तो भी मैं ससम्मान यहां छापता ।



# अगर फिर से इस सदर्भ में बेनामी टिप्पणी आई तो समझ जाऊंगा कि वो आपकी नहीं , मेरे किसी अन्य आत्मीयजन की टिप्पणी है , जो संकोचवश अपना नाम नहीं बता रहे …

बेनामी ने कहा…

This surely makes great sense!

बेनामी ने कहा…

You are completely right on this one..

बेनामी ने कहा…

What a really great read!!!

पद्म ने कहा…

घर का मालिक बन गया ... जो चौकीदार है ! ... एक एक शे'र लाजवाब ! ... जबर्दस्त !