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23/11/12

सितारा हूं ; अगर टूटा… बनूंगा मैं महे-कामिल

ग़ज़ल
खड़ा मक़्तल में मेरी राह तकता था मेरा क़ातिल
सुकूं था मेरी सूरत पर , धड़कता था उसी का दिल

बचाना तितलियों कलियों परिंदों को मुसीबत से
सभी मा'सूम होते हैं हिफ़ाज़त-र ह् म के क़ाबिल

पता है ; क्यों बुझाना चाहता तूफ़ां चराग़ों को
हुई लेकिन हवा क्यों साज़िशों में बेसबब शामिल

मैं अपनी मौज में रहता हूं बेशक इक ग़ज़ाला ज्यूं
दबोचे कोई हमला'वर नहीं इतना भी मैं गाफ़िल

न लावारिस समझ कर हाथ गर्दन पर मेरी रखना
सितारा हूं ; अगर टूटा… बनूंगा मैं महे-कामिल

ग़ज़ल से जो तअल्लुक  पूछते मेराज़रा सुनलें
समंदर भी मेरा , कश्ती मेरी , ये ही मेरा साहिल

कशिश है ज़िंदगी में जब तलक दौरे-सफ़र जारी
हसीं ख़्वाबों का क्या होगा , मिली राजेन्द्र गर मंज़िल
-राजेन्द्र स्वर्णकार
©copyright by : Rajendra Swarnkar
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शब्दार्थ
मक़्तल-क़त्लघर/वध-स्थान
बेसबब-अकारण
ग़ज़ाला-हिरनी/हिरनी का बच्चा
महे-कामिल-पूर्ण चंद्रमा/पूनम का चांद

59 टिप्‍पणियां:

Anita ने कहा…

बहुत-बहुत खूबसूरत ग़ज़ल !:)
हमें भी एक शेर याद आ गया...
"कह दो आँधियों से अब आएँ बुझाने को...
हमने खूँ अपना जला रक्खा... है चिराग़ों में..."
~सादर !

हरकीरत ' हीर' ने कहा…

अभी तो बस आनंद ले रहे हैं इस खूबसूरत ग़ज़ल है .....
माशाल्लाह ....!!
एक -एक हर्फ़ दिल में उतर रहा है ....

चलें पहले कुछ परिंदों तितलियों को बचा आयें .....:))

Sadhana Vaid ने कहा…

हर शेर लाजवाब है और हर ख्याल पुरअसर ! बहुत ही खूबसूरत गज़ल कही है राजेन्द्र भाई ! मेरी मुबारकबाद कबूल कीजिये !

यादें....ashok saluja . ने कहा…

खुबसूरत अहसासों से भरी गज़ल...
मुबारक कबूलें!

Madan Mohan Saxena ने कहा…

बहुत खूब बहुत खूब !

बहुत शानदार ग़ज़ल शानदार भावसंयोजन हर शेर बढ़िया है आपको बहुत बधाई

गीता पंडित ने कहा…

वाह... वाह..
बहुत ख़ूबसूरत गज़ल ...

हर शेर नायाब ...
बधाई आपको दिल से ..

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

बहुत खूबसूरत गज़ल....

Kailash Sharma ने कहा…

बेहतरीन...बहुत खूबसूरत गजल...

Dr. Kishan Tiwari ने कहा…

GAZAL ACHHEE LAGI SUKRIYA.
DR. KISHAN TIWARI BHOPAL

सदा ने कहा…

वाह ... हर शेर जबरदस्‍त ...आभार आपका इस उत्‍कृष्‍ट प्रस्‍तुति के लिये

डॉ टी एस दराल ने कहा…

सकूं था मेरी सूरत पर , धड़कता था उसी का दिल.

वाह वाह ! बहुत खूब !
हमें तो सबसे ज्यादा यही पंक्ति समझ में आई.

KAHI UNKAHI ने कहा…

बहुत सुन्दर...।

sushma 'आहुति' ने कहा…

बहुत ही सुन्दर.....

Devi Nangrani ने कहा…

Vaah sunder akarshak nazare par shabdon ka sahi ankush
Rajendraji
aap ki qalam aap ki pehchaan bani hai
badhayi

Devi Nangrani

ऋता शेखर मधु ने कहा…

बहुत सुंदर ग़ज़ल है
महे-कामिल वाला बहुत अच्छा है
शब्दार्थ नहीं रहता तो समझ में ही नहीं आता...
सादर बधाई

प्रतिभा सक्सेना ने कहा…

क्या कहूँ आपके लिये राजेन्द्र जी, शब्द पर्याप्त नहीं.अद्भुत है आपका सृजन!
शब्दार्थ देकर बहुत अच्छा किया .

mahendra verma ने कहा…

अल्फाज़ हैं या झिलमिलाते तारे..!

बार-बार गुनगुनाने के लिए प्रेरित करती शानदार ग़ज़ल।

प्रतुल वशिष्ठ ने कहा…

गजल की समझ मेरी यहीं विकसित हो रही है। शब्दों के इस्तेमाल पर ही मुग्ध रहता हूँ। स्वर्णकार जी अब निकष हो गए हैं पढ़ते-पढ़ते लोह-सी चमकहीन आँखें स्वर्ण-सी सहसा चमक जाती हैं। एक अचम्भा हमेशा बना रहता है कि कैसे कोई इतने करीने से अभिव्यक्ति को सजा सकता है! अद्भुत है कवित्व-शक्ति। मैथिलीशरण गुप्त की पंक्तियाँ यहाँ दोहराना चाहूँगा :


अयि, दयामयि देवि सुखदे सारदे!

इधर भी निज वरद पाणि पसार दे।

दास की यह देह तंत्री तार दे।

रोम-तारों में नयी झंकार दे।

बैठ मानस हंस पर कि सनाथ हो।

भारवाही कंठकेकी साथ हो।

वन्दना ने कहा…

आपका इस प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार (24-11-2012) के चर्चा मंच पर भी होगी!
सूचनार्थ!

prritiy----sneh ने कहा…

bahut hi achha likha hai

bachana titliyon kaliyon parindon ko musibat se
sabhi masoom hote hain hifajat-raham ke kabil

bahut gehre bhaav liye hain.

shubhkamnayen

Rajesh Kumari ने कहा…

पता है ; क्यों बुझाना चाहता तूफ़ां चराग़ों को
हुई लेकिन हवा क्यों साज़िशों में बेसबब शामिल

मैं अपनी मौज में रहता हूं बेशक इक ग़ज़ाला ज्यूं
दबोचे कोई हमला'वर नहीं इतना भी मैं गाफ़िल
लाजबाब अशआर लिखे हैं राजेन्द्र जी सभी एक से बढ़कर एक बहुत बढ़िया ग़ज़ल दाद कबूल करें

ई. प्रदीप कुमार साहनी ने कहा…

बहुत खूबसूरत और शानदार गजल | एक एक शेर जबर्दस्त | दिल खुश हो गया पढ़ के |

मेरी नई पोस्ट-गुमशुदा

चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ ने कहा…

nice

मान जाऊंगा..... ज़िद न करो ने कहा…

हरेक शेर खुबसूरत है... लाजवाब... इस ग़ज़ल के लिए दिल से बधाई....

आकर्षण

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

बहुत खूब..

Asha Saxena ने कहा…

उम्दा गजल |यह अच्छा लगा की आपने कठिन शब्दों के मीनिग भी दिए हैं |
आशा

Onkar ने कहा…

सुन्दर शेर

Mukesh Kumar Sinha ने कहा…

खूबसूरत गज़ल
बेहतरीन..;)

आमिर दुबई ने कहा…

लिखते तो आप भी लाजवाब हैं। उर्दू और हिंदी भाषाओँ में रची कई रचनाएँ सभी लाजवाब हैं। एक ख़ुशी ये भी है की आप हमारे राजस्थान से हैं। भारतीय ब्लोगर्स के सामूहिक समूह ''इंडियन ब्लोगर्स वर्ल्ड '' पर आपका स्वागत है। आप भी इंडियन ब्लोगर्स वर्ल्ड के सदस्य बनकर भारतीय ब्लोगर्स के साथ साथ हिंदी ब्लॉग जगत में चलते रहिये।

इंडियन ब्लोगर्स वर्ल्ड

रविकर ने कहा…

इतनी बढ़िया गजल पर -नि:शब्द हो जाता हूँ-
पहले भी पढ़ी थी सुबह में-
पर दुबारा पढ़कर भी नि:शब्द हूँ-
आभार आदरणीय ||


सिखने की कोशिश यहाँ भी की है मैंने-
मात्राओं को कैसे मिलते हैं-
कुछ कुछ समझ आ रहा है-
सादर ||

Virendra Kumar Sharma ने कहा…

लहरों का अपना खेला है जिधर ले जाएँ असल बात है समुन्दर में उतरना शायरी करना .

निहार रंजन ने कहा…

बेहतरीन ग़ज़ल राजेंद्र जी.

Ramakant Singh ने कहा…

भाई साहब कुछ भी कहने की औकात नहीं . समन्दर भी आपका , कश्ती भी आपकी , साहिल भी आपका अपना क्या बात कही है आपने. निःशब्द ..

तिलक राज कपूर ने कहा…

वाह भाई वाह। इस मुकम्‍मल लाजवाब ग़ज़ल पर बधाई।

रमेश जोशी ने कहा…

राजेन्द्र जी
एक अच्छी गज़ल के लिए बधाई
रमेश जोशी

--

रमेश जोशी, Ramesh Joshi
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नीरज गोस्वामी ने कहा…

भाई जी
देरी से आने की माफ़ी...लेकिन क्या आनंद आया है यहाँ आ कर ...वाह...एक एक शेर हीरे सा तराशा हुआ है....सच्चे जोहरी हो आप भाई जी...आपकी ग़ज़लें और अंदाज़े बयां सबसे जुदा होता है...लाजवाब...गज़ब...बेमिसाल...ढेरो दाद कबूल करें...लिखते रहें.

नीरज

rohitash kumar ने कहा…

दिल खुश कर दिया..क्या लिखा है बास..आपने मगर इसे गाया क्यों नहीं....या मुझे वो लिंक दिखा नहीं?

Dr.Bhawna ने कहा…

Bahut khubsurat bhaav...

Yograj Prabhakar ने कहा…

मतले से मक़ते तक मोती जड़ दिए हैं आदरणीय राजेंद्र भाई जी, बेहद पुरनूर और पुरकशिश अशार हुए हैं, मेरी दिली मुबारकबाद कबूल फरमाएं

प्रवेश सोनी ने कहा…

बहुत ही खूबसूरत गज़ल है

shalini ने कहा…

राजेन्द्र जी ...हरेक शेर सीधा दिल तक उतर गया ... लाजवाब गज़ल...

उपेन्द्र नाथ ने कहा…

bahut hi khubsurat panktiya... sunder prastuti.

अल्पना वर्मा ने कहा…

वाह!वाह!और बस वाह!
बहुत उम्दा ग़ज़ल .

अल्पना वर्मा ने कहा…

वाह!वाह!और बस वाह!
बहुत उम्दा ग़ज़ल .

Dr Varsha Singh ने कहा…

उत्‍कृष्‍ट अभिव्‍यक्ति.....सशक्त रचना......

Hari Shanker Rarhi ने कहा…

very sweet!

शालिनी कौशिक ने कहा…


बहुत सुन्दर व् सार्थक भावाभिव्यक्ति .बधाई
दहेज़ :इकलौती पुत्री की आग की सेज

Anupama Tripathi ने कहा…

bahut sundar gazal ....
shubhkamnayen.

manorama sharma ने कहा…

very nice gazal...

रज़िया "राज़" ने कहा…

बहोत सुंदर ग़ज़ल ।

बचाना तितलियों कलियों परिंदों को मुसीबत से

सभी मा'सूम होते हैं हिफ़ाज़त-रहुम के क़ाबिल

वाह...बेहद खूबसुरत शे'र

आपकी हर बात को सर आंखों पर रखा दिया हमने
देख़ो फ़िर एक कहानीओ फ़साना लिख दिया हमने

गिरिजा कुलश्रेष्ठ ने कहा…

bahut hi umda bhav. khoobsurat abhivyakti.

Udan Tashtari ने कहा…

उम्दा...हमेशा की तरह,...वाह!

Rajendra Swarnkar : राजेन्द्र स्वर्णकार ने कहा…


आप सबका हृदय से आभार !
स्नेह भाव बनाए रहिएगा …
संपर्क / संवाद की कमी के कारण मुझे अपने स्नेह से वंचित न करें …


शुभकामनाओं सहित…

Rajendra Swarnkar : राजेन्द्र स्वर्णकार ने कहा…

#
12-12-12 के अद्भुत् संयोग के अवसर पर
लीजिए आनंद ,
कीजिए आस्वादन
वर्ष 2012 के 12वें महीने की 12वीं तारीख को
12 बज कर 12 मिनट 12 सैकंड पर
शस्वरं पर पोस्ट किए
मेरे लिखे 12 दोहों का

:)

expression ने कहा…

सुन्दर गज़ल....
जाने कैसे रह गयी पढ़ने से..
क्षमा...

दोहे नज़र नहीं आ रहे..

सादर
अनु

S.M.HABIB (Sanjay Mishra 'Habib') ने कहा…

आदरणीय राजेन्द्र भईया
सादर नमस्कार
आनंद आ गया खुबसूरत गजल के एक एक शेर को पढ़कर...इसे गुनगुनाते हुए ख़याल आता रहा कि अगर इस गजल में आपकी आवाज भी होती तो क्या ही आनद आता...
सादर बधाई स्वीकारें शानदार गजल के लिए...

Savita Mishra ने कहा…

बहुत सुन्दर ........
वैसे कोई कवियत्री तो हम भी नहीं फिर भी आप हमारे ब्लॉग पर आ हमारा उत्साहवर्धन किया आपका बहुत बहुत आभार ..आशा है हूँ ही हमारा मार्गदर्शन करतें रहेगें ..बहुत बहुत धन्यवाद ..

Savita Mishra ने कहा…

बहुत सटीक व्यंग पूर्ण दोहे भैया .......
वैसे कोई कवियत्री तो हम भी नहीं फिर भी आप हमारे ब्लॉग पर आ हमारा उत्साहवर्धन किया आपका बहुत बहुत आभार ..आशा है हूँ ही हमारा मार्गदर्शन करतें रहेगें ..बहुत बहुत धन्यवाद ..

Savita Mishra ने कहा…

आपके ब्लॉग पर हम टिप्पड़ी कर नहीं प् रहे है क्यों ?